
हर साल की तरह इस साल भी विश्वकर्मा पूजा पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से इंजीनियरों, कारीगरों, श्रमिकों और तकनीकी उपकरणों से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, तकनीक और वास्तु का देवता माना जाता है। वे देवताओं के शिल्पकार हैं, जिन्होंने स्वर्ग, इंद्रपुरी, पुष्पक विमान, द्वारका नगरी और भगवान शिव का त्रिशूल जैसी अद्भुत रचनाएं की थीं। विश्वकर्मा पूजा को औद्योगिक आस्था और कर्म की पूजा का पर्व भी कहा जा सकता है।
भ्रम की स्थिति
वर्ष 2025 में विश्वकर्मा पूजा को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। कुछ लोग इसे 16 सितंबर को मान रहे हैं, जबकि पंचांग के अनुसार इसका सही दिन 17 सितंबर 2025, बुधवार है। इस दिन कन्या संक्रांति पड़ रही है, जो विश्वकर्मा पूजा के लिए आवश्यक ज्योतिषीय योग है। संक्रांति का समय 16 सितंबर की रात को है, लेकिन पूजा का पूरा दिन 17 सितंबर को मिलता है। इसलिए ज्योतिषाचार्यों की सलाह के अनुसार पूजा 17 सितंबर को ही की जानी चाहिए।
व्यापारियों में ज्यादा मान्यता
इस दिन लोग अपने-अपने कार्यस्थलों पर साफ-सफाई करते हैं और औजारों, मशीनों, वाहनों, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की पूजा करते हैं। सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र की स्थापना की जाती है। फिर फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और तिलक आदि से पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से व्यवसाय में वृद्धि, कार्यों में सफलता और जीवन में समृद्धि आती है। साथ ही, मशीनों और औजारों से होने वाली दुर्घटनाओं से भी रक्षा होती है।
समझाता है कर्म का महत्व
पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से लेकर दोपहर 4:15 बजे तक रहेगा। खासकर सुबह 10:43 से 12:16 बजे के बीच का समय अत्यंत शुभ माना गया है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होता है जो फैक्ट्री, वर्कशॉप, निर्माण कार्य, वाहन मरम्मत या तकनीकी सेवाओं से जुड़े होते हैं। विश्वकर्मा पूजा केवल कर्म के महत्व को समझाने वाला पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें अपने कार्य में लगन, मेहनत और निष्ठा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है। ऐसे में 17 सितंबर को पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा अवश्य करें और अपने जीवन में समृद्धि एवं सफलता का मार्ग प्रशस्त करें।