Vishwakarma Puja 2026: हर साल सितंबर में एक ऐसी पूजा होती है, जिसका इंतजार खासतौर पर कारीगर, इंजीनियर, मशीनों से जुड़े कर्मचारी, दुकानदार और फैक्ट्री संचालक करते हैं। यह पर्व भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। खास बात यह है कि ज्यादातर त्योहारों की तारीखों में बदलाव होता रहता है, लेकिन विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर हर साल 17 सितंबर को ही मनाई जाती है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? धार्मिक परंपराओं के अनुसार विश्वकर्मा पूजा का संबंध भगवान विश्वकर्मा की आराधना से है। उनकी जन्मतिथि को लेकर अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में अलग उल्लेख मिलते हैं। कुछ मान्यताओं में उनका प्राकट्य भाद्रपद मास की अंतिम तिथि में बताया गया है, जबकि कुछ परंपराओं में आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा का जिक्र मिलता है। वहीं, विश्वकर्मा पूजा की निश्चित तारीख का संबंध सौर गणना से भी जोड़ा जाता है। जानें इस तारीख का कन्या संक्रांति से संबंध, पूजा का शुभ मुहूर्त और भगवान विश्वकर्मा का धार्मिक महत्व।
17 सितंबर से क्या है संबंध?
सौर पंचांग के अनुसार सूर्य हर साल सितंबर में कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कन्या संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश का समय सामान्यतः 17 सितंबर के आसपास आता है। इसी वजह से विश्वकर्मा पूजा की तारीख भी सौर कैलेंडर के आधार पर निर्धारित मानी जाती है और इसमें चंद्र पंचांग की तरह बदलाव नहीं होता।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
पौराणिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार और दिव्य वास्तुकार के रूप में वर्णित किया गया है। उन्हें निर्माण कला, वास्तुकला और तकनीकी कौशल से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक कथाओं में उनके द्वारा लंका, द्वारका, अलकापुरी और इंद्रपुरी जैसी भव्य रचनाओं के निर्माण का उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यताओं में कई दिव्य अस्त्रों के निर्माण का श्रेय भी भगवान विश्वकर्मा को दिया गया है। इनमें भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और पिनाक, इंद्र का वज्र तथा अन्य दिव्य आयुध शामिल हैं।
17 सितंबर को कब करें पूजा?
पंचांग के मुताबिक 17 सितंबर 2026 की सुबह 7:58 बजे सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद विश्वकर्मा पूजा की जा सकती है। पूजा के लिए पूरे दिन का समय उपलब्ध माना गया है। विशेष मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। वहीं दुकान, प्रतिष्ठान और फैक्ट्री में पूजा के लिए दोपहर 12:16 बजे से 1:48 बजे तक का समय भी शुभ माना गया है।
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मशीनों और औजारों की पूजा की परंपरा
विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, वर्कशॉप, गैराज, निर्माण स्थलों और उन जगहों पर विशेष पूजा होती है, जहां मशीनों और औजारों का इस्तेमाल किया जाता है। लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और मशीनों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। इस पर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं माना जाता। इसे मेहनत, हुनर और श्रम के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाता है। अलग-अलग समुदायों और पेशों से जुड़े लोग इस अवसर पर अपने काम के साधनों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं और बेहतर काम, उन्नति तथा सुरक्षा की कामना करते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।