Vladimir Putin Security: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब किसी दूसरे देश के दौरे पर जाते हैं तो उनके साथ सिर्फ सुरक्षाकर्मियों का काफिला नहीं चलता। उनकी सुरक्षा व्यवस्था इतनी व्यापक बताई जाती है कि इसमें खाने-पानी से लेकर होटल के कमरे और यहां तक कि उनके शरीर से जुड़े जैविक अवशेषों तक को लेकर सावधानी बरती जाती है। मकसद यह होता है कि पुतिन से जुड़ा कोई ऐसा जैविक नमूना पीछे न छूटे, जिसका इस्तेमाल उनकी पहचान या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सके। पुतिन की सुरक्षा में तैनात टीम के लिए उनके इस्तेमाल की चीजों को लेकर भी खास प्रोटोकॉल होने की बात सामने आती रही है। टिश्यू, गिलास, तौलिया या दूसरी इस्तेमाल की गई वस्तुओं को सुरक्षित तरीके से वापस ले जाने की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में तो यह भी दावा किया गया है कि जिस होटल में पुतिन ठहरते हैं, वहां कमरे की प्लंबिंग तक को नियंत्रित किया जाता है।
माओ जेदांग से जुड़ी पुरानी जासूसी कहानी
पुतिन की इस तरह की सुरक्षा को समझने के लिए सोवियत दौर की एक कथित जासूसी घटना का जिक्र किया जाता है। साल 1949 में चीन के नेता माओ जेदांग मॉस्को पहुंचे थे। उस समय सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन को माओ पर पूरी तरह भरोसा नहीं था। बीबीसी की एक रिपोर्ट में पूर्व सोवियत खुफिया अधिकारी इगोर अतामानेंको के हवाले से बताया गया था कि सोवियत खुफिया तंत्र विदेशी नेताओं के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उनके जैविक नमूनों का इस्तेमाल करता था। दावा है कि माओ की मॉस्को यात्रा के दौरान उनके लिए ऐसा विशेष टॉयलेट इस्तेमाल किया गया, जिसमें मल को सीवर में जाने के बजाय अलग कंटेनर में जमा किया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर इन नमूनों को एक गुप्त प्रयोगशाला में भेजा गया, जहां उनमें मौजूद विभिन्न रासायनिक तत्वों का अध्ययन किया गया। सोवियत वैज्ञानिकों का मानना था कि इनसे किसी व्यक्ति के स्वभाव और मनोवैज्ञानिक स्थिति के बारे में संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
KGB के पूर्व अधिकारी हैं पुतिन
पुतिन खुद सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी KGB में अधिकारी रह चुके हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में जासूसी के संभावित तरीकों को लेकर असाधारण सावधानी बरते जाने की बात कही जाती है। विदेश यात्राओं के दौरान रूस की ओर से पहले से ही सुरक्षा टीम, सैन्य अधिकारी, कम्युनिकेशन विशेषज्ञ, डॉक्टर, लॉजिस्टिक्स स्टाफ और विशेष वाहन भेजे जाते हैं। कई मौकों पर राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए जरूरी सामान और भोजन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी पहले से तैयार की जाती हैं।
होटल के कमरे से लेकर खाने तक की जांच
पुतिन के विदेशी दौरों को लेकर यह भी रिपोर्ट किया गया है कि उनके लिए पानी, मेडिकल किट, बिस्तर और अन्य जरूरी सामान रूस से भेजे जाते हैं। जिस होटल में वह रुकते हैं, वहां उनके पहुंचने से पहले कमरे की सफाई और सैनिटाइजेशन कराया जाता है। खाने को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त बताई जाती है। रिपोर्टों के अनुसार, 2010 के आसपास पुतिन के विदेशी दौरों के दौरान मोबाइल फूड लैब जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल शुरू किया गया। यहां भोजन और पानी की जांच की जाती थी, जिसके बाद ही उसे राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
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जैविक फुटप्रिंट को लेकर बढ़ी सतर्कता
साल 2014 के बाद पुतिन की विदेश यात्राओं में जैविक सुरक्षा पर भी ज्यादा ध्यान दिए जाने की खबरें सामने आईं। उनके इस्तेमाल की चीजों को इकट्ठा कर रूस वापस ले जाने की व्यवस्था की जाती है, ताकि दूसरे देश में उनके जैविक अवशेष न रह जाएं। यूक्रेन युद्ध के बाद राष्ट्रपति की सुरक्षा को और मजबूत किए जाने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं। उनकी सुरक्षा में ड्रोन जैमर, एंटी-ड्रोन सिस्टम, बुलेटप्रूफ और विस्फोटरोधी वाहन तथा स्नाइपर टीम जैसी व्यवस्थाएं शामिल होने की बात कही जाती है। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए रूस का संघीय सुरक्षा तंत्र कई स्तरों पर काम करता है। क्रेमलिन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, पुतिन की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से बड़ी संख्या में जवान तैनात रहते हैं। यही वजह है कि पुतिन का विदेश दौरा शुरू होने से पहले ही सुरक्षा का एक पूरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है।