Bombay High Court: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने ट्रैफिक नियमों और सिविक सेंस को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए नागरिकों को जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की नसीहत दी है। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग सड़क पर अनुशासन सीखें और विकसित देशों की तरह नियमों का पालन करें।
सड़क पर जिम्मेदारी जरूरी: कोर्ट
जस्टिस जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने कहा कि लोग अक्सर सिग्नल तोड़कर सड़क पार करते हैं, जिससे हादसे होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर नागरिक को ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना चाहिए और बिना नियम तोड़े सड़क पार करनी चाहिए। खासकर दोपहिया वाहन चालकों द्वारा नियमों की अनदेखी पर भी चिंता जताई गई।
ट्रैफिक पुलिस को सख्ती के निर्देश
कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि वे अच्छा काम कर रही है, लेकिन नियम तोड़ने वालों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। अदालत ने कहा कि लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई ही हादसों को कम कर सकती है।
बस हादसे से जुड़ा था मामला
यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक व्यक्ति की सड़क पार करते समय बस की टक्कर से मौत हो गई थी। पीड़ित पार्किंसन बीमारी से जूझ रहा था और आंशिक रूप से लकवाग्रस्त था। हादसा ठाणे में हुआ था, जिसके बाद परिवार ने मुआवजे को बढ़ाने की मांग की थी।
मुआवजा बढ़ाकर 15 लाख किया
अदालत ने मामले में दोनों पक्षों की जिम्मेदारी मानते हुए कहा कि मृतक को सावधानी बरतनी चाहिए थी, वहीं बस चालक को भी सतर्क रहना चाहिए था। सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मुआवजे की राशि 13 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी।