भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को अपने धार्मिक प्रवास के दौरान ब्रजभूमि की पवित्र नगरी वृंदावन का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने बांके बिहारी मंदिर, निधिवन और सुदामा कुटी में विशेष दर्शन और पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी को 56 भोग अर्पित कर देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद निधिवन में दीप प्रज्वलित किया और सुदामा कुटी परिसर में कल्पवृक्ष (पारिजात) का पौधा लगाकर ब्रजभूमि के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
बांके बिहारी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना
राष्ट्रपति मुर्मू सबसे पहले बांके बिहारी मंदिर पहुंचीं, जहां पूरे मंदिर परिसर को फूलों और मालाओं से सजाया गया था। मंदिर के पुजारी गौरव कृष्ण गोस्वामी ने विशेष पूजा संपन्न कराई। राष्ट्रपति ने ठाकुर जी के चरणों में स्वास्तिक बनाकर 56 भोग अर्पित किए और देश में शांति व समृद्धि की प्रार्थना की। इस अवसर पर उनके बेटे आरव गोस्वामी ने गीता संदेश से युक्त भजन प्रस्तुत किया, जिसमें “कोई अपना नहीं, कोई पराया नहीं” का भाव समाहित था।
निधिवन में परिक्रमा और दीप प्रज्वलन
मंदिर दर्शन के बाद राष्ट्रपति निधिवन पहुंचीं। यहां उन्होंने पूर्ण परिक्रमा की और उस स्थान पर दीप जलाया, जहां ठाकुर जी का प्राकट्य हुआ था। उन्होंने राधारानी के श्रृंगार स्थल पर सोलह श्रृंगार अर्पित कर प्रसादी बंसी भेंट की और हरिदास जी की जीवित समाधि के दर्शन किए। निधिवन के वृक्षों को गोपियों का स्वरूप माना जाता है और यहां के चार प्रमुख स्थलों—बांके बिहारी प्राकट्य स्थल, रंगमहल, रास मंडल और हरिदास समाधि—के दर्शन कर राष्ट्रपति ने आध्यात्मिक अनुभव साझा किया।
सुदामा कुटी में कल्पवृक्ष का पौधा
अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव पर राष्ट्रपति मुर्मू सुदामा कुटी पहुंचीं। यहां उन्होंने भजन कुटी का लोकार्पण किया और कल्पवृक्ष (पारिजात) का पौधा रोपित किया। महंत अमरदास जी महाराज ने बताया कि सुदामा कुटी में प्रतिदिन रासलीला होती है और यहां के चने के भोग को दुख और दरिद्रता दूर करने वाला माना जाता है। महंत ने कहा कि राष्ट्रपति का यह कदम मित्रता और प्रेम का संदेश देता है, जैसा द्वापर युग में कृष्ण और सुदामा की मित्रता थी।