‘वृंदावन। धर्मनगरी वृंदावन में मंगलवार को एक दुर्लभ आध्यात्मिक संगम देखने को मिला, जब श्रीराम सेवा आश्रम के महंत नवलराम महाराज श्रीराधा हेति केलि कुंज आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से भेंट की। यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि संत परंपरा के उस गहन संवाद का हिस्सा बनी, जिसमें "प्रणाम" के महत्व और "अहंकार" के त्याग पर विशेष चर्चा हुई।
प्रणाम में छिपा है अहंकार से मुक्ति का मार्ग
भेंट के दौरान नवलराम महाराज ने प्रेमानंद महाराज को एक आध्यात्मिक पुस्तक भेंट की और सादर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा, “प्रणाम सदैव अपने से श्रेष्ठ को किया जाता है और भगवान सबसे श्रेष्ठ हैं। जब जीव प्रणाम करता है, तो उसका अहंकार स्वतः समाप्त हो जाता है।” उनके अनुसार, अहंकार ही मानव जीवन की सबसे बड़ी बाधा है और प्रणाम से उसका ह्रास संभव है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज से धर्मप्रचार को निरंतर जारी रखने का आग्रह करते हुए कहा कि संत समाज उनके प्रति कृतज्ञ है।
“हम तो संतों का झूठन ही बांटते हैं” — प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज ने विनम्रता से उत्तर देते हुए कहा, “हम तो आप सब संतों का झूठन ही भक्तों में बांटते हैं। यदि महापुरुषों के वचनों के अनुसार चला जाए, तो यह कलिकाल है ही नहीं।” उन्होंने वर्तमान समय में श्रद्धा और सेवा की भावना को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
नवलराम महाराज: सादगी और सेवा के प्रतीक
नवलराम महाराज श्रीराम सेवा आश्रम, वृंदावन के संस्थापक और महंत हैं। वे अपने अनुयायियों को भगवान के नाम जपने, सेवा और विनम्रता का संदेश देते हैं। उनकी सरल जीवनशैली और निस्वार्थ सेवा ने उन्हें वृंदावन के संत समाज में एक अलग पहचान दी है। भक्त उन्हें ऐसे संत के रूप में देखते हैं जो समाज को केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन का उदाहरण देकर दिशा देते हैं।