VVS Laxman BCCI Selection Role : टीम इंडिया के चयन को लेकर BCCI ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब राष्ट्रीय चयन समिति की बैठकों में सिर्फ चयनकर्ता ही नहीं, बल्कि वीवीएस लक्ष्मण भी शामिल होंगे। लक्ष्मण फिलहाल BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) और क्रिकेट संचालन से जुड़े सबसे अहम अधिकारियों में शामिल हैं। बोर्ड का मानना है कि इससे खिलाड़ियों की फिटनेस और उपलब्धता को लेकर बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल के दिनों में कई बार ऐसे मामले सामने आए, जब खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस को लेकर अलग-अलग तरह की जानकारी सामने आई। इससे चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि लक्ष्मण के पास खिलाड़ियों की फिटनेस, रिहैब और मेडिकल रिपोर्ट से जुड़ी पूरी जानकारी रहती है। इसलिए उनका चयन बैठकों में मौजूद रहना जरूरी समझा गया।
खिलाड़ियों की चोट पर मिलेगी सटीक जानकारी
अब तक चयनकर्ताओं को खिलाड़ियों की मेडिकल स्थिति की जानकारी रिपोर्टों के जरिए मिलती थी। लेकिन कई बार वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती थी। लक्ष्मण की मौजूदगी में चयनकर्ताओं को सीधे और सटीक अपडेट मिलेंगे। इससे यह तय करना आसान होगा कि कौन खिलाड़ी खेलने के लिए पूरी तरह फिट है और किसे अभी और समय चाहिए।
शुभमन गिल के बयान के बाद बढ़ी चिंता
इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह हाल में कप्तान शुभमन गिल की चिंता भी मानी जा रही है। वेस्टइंडीज सीरीज के दौरान गिल ने लगातार चोटिल हो रहे खिलाड़ियों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि 2027 विश्व कप ज्यादा दूर नहीं है और टीम के पास प्रयोग करने के लिए सीमित समय है। ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस पर स्पष्ट तस्वीर होना जरूरी है।
मुंबई समीक्षा बैठक में बनी सहमति
जानकारी के मुताबिक, मुंबई में हुई समीक्षा बैठक के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। वहीं यह महसूस किया गया कि चयन समिति और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है। इसी के बाद तय किया गया कि वीवीएस लक्ष्मण भविष्य की चयन बैठकों में हिस्सा लेंगे और खिलाड़ियों की मेडिकल व फिटनेस स्थिति पर सीधा इनपुट देंगे।
इसे भी पढ़ें : न्यूजीलैंड दौरे के लिए India A का ऐलान, Rishabh Pant नहीं इस युवा खिलाड़ी को मिली कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी
टीम इंडिया को क्या होगा फायदा?
BCCI का मानना है कि इस फैसले से चयन प्रक्रिया और ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी होगी। खिलाड़ियों की चोट, रिकवरी और उपलब्धता को लेकर भ्रम कम होगा। साथ ही बड़े टूर्नामेंटों से पहले सही खिलाड़ियों का चयन करने में मदद मिलेगी। बोर्ड को उम्मीद है कि इससे टीम इंडिया की तैयारी और मजबूत होगी और भविष्य में फिटनेस से जुड़े विवाद भी कम होंगे।