मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले को लेकर एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सीबीआई और राज्य सरकार से अब तक की कार्रवाई पर विस्तृत जवाब मांगा है। 11 साल पुराने इस घोटाले में नई जांच की दिशा तय हो सकती है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायतकर्ता की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
Supreme Court of India ने व्यापमं घोटाले की जांच को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने 320 पन्नों की शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, जांच और दाखिल चार्जशीट का पूरा ब्यौरा एफिडेविट के रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई
16 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
पूर्व विधायक की याचिका से खुला मामला
यह पूरा मामला पूर्व विधायक Paras Saklecha की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील Vivek Tankha ने पक्ष रखा। इससे पहले यह याचिका मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में खारिज हो चुकी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए सुनवाई के लिए स्वीकार किया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद नया मोड़
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद अब इस केस में नया मोड़ आ गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शिकायतकर्ता की भूमिका अहम होती है और उसकी बातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
11 साल पुराना घोटाला फिर सुर्खियों में
करीब 11 साल पुराने व्यापमं घोटाले की जांच अब फिर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। इस घोटाले ने राज्य की परीक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जांच में नए खुलासे सामने आ सकते हैं।
अब तक 12 दोषियों को मिल चुकी सजा
इस मामले में अब तक 12 लोगों को सजा सुनाई जा चुकी है। दूसरों की जगह मेडिकल परीक्षा देने वाले आरोपियों को पांच-पांच साल की सश्रम कारावास की सजा दी गई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा पाने वाले अधिकांश आरोपी उच्च शिक्षित और मेडिकल बैकग्राउंड से जुड़े बताए गए हैं।