Supreme Court Delivers: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसे सड़क पर वाहनों की आवाजाही से कम नहीं आंका जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान नागरिकों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार देता है, इसलिए सुरक्षित और सुगम पैदल मार्ग उपलब्ध कराना राज्य और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। यह फैसला सड़क सुरक्षा और शहरी ढांचे से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संविधान के तहत सुरक्षित है पैदल चलने का अधिकार
न्यायालय ने कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(D) के तहत मिलने वाली स्वतंत्रता का हिस्सा है। यह प्रावधान नागरिकों को देश के किसी भी हिस्से में स्वतंत्र रूप से घूमने-फिरने का अधिकार देता है। अदालत ने कहा कि इस अधिकार को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के साथ पढ़ा जाना चाहिए, जिससे नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित हो सके।
हर सड़क पर फुटपाथ की व्यवस्था जरूरी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जहां सड़कें मौजूद हैं, वहां पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ की व्यवस्था भी होनी चाहिए। केवल फुटपाथ बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका नियमित रखरखाव भी जरूरी है। अदालत ने इसे प्रशासन की ऐसी जिम्मेदारी बताया जिसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। न्यायालय का मानना है कि सुरक्षित पैदल मार्ग सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दुर्घटना मामले की सुनवाई में आया फैसला
यह फैसला एक सड़क दुर्घटना से जुड़े मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान आया। मामले में एक पांच वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी, जब उसे स्कूल ले जाते समय एक टैंकर ने टक्कर मार दी थी। घटना स्थल पर न तो फुटपाथ था और न ही सुरक्षित पैदल पार मार्ग की व्यवस्था थी। अदालत ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया और सड़क सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुआवजा बढ़ाकर देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने मृतक बच्चे के परिवार को मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाकर 11.44 लाख रुपये कर दी। साथ ही संबंधित पक्ष को दो महीने के भीतर यह राशि देने का निर्देश भी दिया गया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें पहले निर्धारित मुआवजे को कम कर दिया गया था। फैसले को पैदल यात्रियों के अधिकारों और सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।