Warning of Attack on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित कड़े सैन्य रुख पर पश्चिम एशिया के कई रणनीतिक विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका सीमित हवाई हमलों से आगे बढ़कर ईरान में लंबे समय तक चलने वाले जमीनी सैन्य अभियान की ओर जाता है, तो उसे वियतनाम युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की चुनौती केवल उसकी नियमित सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी क्षेत्रीय रणनीति और सहयोगी नेटवर्क भी किसी भी संघर्ष को अधिक जटिल बना सकते हैं।
संघर्ष का दायरा
पश्चिम एशिया मामलों के जानकार डेविड हर्स्ट के अनुसार, ईरान की रणनीतिक ताकत उसके क्षेत्रीय सहयोगियों और प्रभाव वाले समूहों में भी दिखाई देती है। उनका कहना है कि किसी बड़े सैन्य अभियान की स्थिति में संघर्ष केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाड़ी क्षेत्र और आसपास के देशों तक फैल सकता है। हाल के महीनों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों और बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को भी इसी व्यापक परिदृश्य से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
असममित युद्ध बना सकता है चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ असममित युद्ध की रणनीति अपनाने में सक्षम माना जाता है। कम लागत वाले ड्रोन, मिसाइलों और समुद्री मार्गों पर दबाव जैसी रणनीतियां किसी भी बड़े सैन्य अभियान को अधिक कठिन बना सकती हैं। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
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अमेरिका के भीतर भी बढ़ रही राजनीतिक चिंता
विश्लेषकों का कहना है कि लंबे सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिका के भीतर भी पहले जैसा व्यापक समर्थन नहीं दिखाई देता। कई सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में नागरिक किसी लंबे युद्ध के पक्ष में नहीं दिखे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है और अमेरिकी सैनिकों की हानि बढ़ती है, तो इसका असर घरेलू राजनीति और सरकार की लोकप्रियता पर भी पड़ सकता है। इसलिए सैन्य कार्रवाई के साथ राजनीतिक और जनमत संबंधी चुनौतियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
कूटनीति को प्राथमिकता देने की सलाह
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वियतनाम युद्ध का अनुभव बताता है कि केवल सैन्य शक्ति हर जटिल संघर्ष का समाधान नहीं होती। उनके अनुसार, यदि अमेरिका सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयासों को भी जारी रखता है, तो तनाव को नियंत्रित रखने की संभावना अधिक होगी। वहीं, यदि जमीनी युद्ध की दिशा में कदम बढ़ाए जाते हैं, तो संघर्ष लंबा, महंगा और राजनीतिक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि ईरान से जुड़ा कोई भी फैसला केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभावों को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।