अमेरिका के दिग्गज निवेशक और टॉप रईसों में शामिल वॉरेन बफे ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है. इस ऐलान के साथ ही वॉरेन बफे ने बर्कशायर को तगड़ा झटका भी दिया है. दरअसल बफे ने ऐलान किया है कि वे अब बर्कशायर के वार्षिक पत्र यानी कि सालाना लेटर नहीं लिखेंगे. पिछले 6 दशकों से बफे ये लेटर लिख रहे हैं. जो कि दुनिया भर के निवेशकों के लिए बाइबिल से कम नहीं हैं. हालांकि उनका कहना है कि वे हर साल थैंक्सगिविंग पर अपने शेयरधारकों को संदेश जरूर भेजते रहेंगे. बता दें कि बफे 149 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 11वें नंबर पर हैं.
बफे ने लिखा है कि "मैं अब बर्कशायर की वार्षिक रिपोर्ट नहीं लिखूंगा और न ही वार्षिक बैठक में अंतहीन बातें करूंगा. अंग्रेजों की भाषा में कहूं तो अब मैं शांत हो रहा हूं." इसके साथ ही लंबे समय से बफे के साथी रहे ग्रेग एबेल इस साल के अंत तक आधिकारिक तौर पर बर्कशायर के CEO का पद संभाल सकते हैं. वहीं बफे ने अपने इस लेटर की शुरुआत व्यक्तिगत अंदाज में की. उन्होंने लिखा कि "मैं 95 साल की उम्र तक जीवित रहने के लिए अपनी किस्मत पर आभारी और हैरान हूं."
ननों के फिंगरप्रिंट
इसके साथ ही दिग्गज निवेशक बफे ने साल 1938 में हुई एक अपेंडिसाइटिस की घटना को याद किया, जब वे आठ साल की उम्र में मौत के करीब पहुंच चुके थे. उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें ओमाहा के एक कैथोलिक अस्पताल में भेजा गया था. जहां पर सर्जरी के बाद उन्होंने ननों की उंगलियों के निशान लिए थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि किसी दिन कोई नन गलत रास्ते पर चली जाएगी और एफबीआई को उन रिकॉर्ड्स की जरूरत पड़ेगी.
इसके अलावा बफे ने ओमाहा के बारे में भी लिखा जिसे वह अपना घर कहते हैं. उन्होंने कहा कि वह और बर्कशायर दोनों ओमाहा में अपने आधार के कारण बेहतर हुए. इसके साथ ही बफे ने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया. इनमें चार्ली मुंगेर भी शामिल थे जो कि 60 साल से ज्यादा समय तक बफे के साथी रहे. उनका निधन साल 2023 में हो गया था. बफे ने लिखा, "हमारे मतभेद थे, लेकिन कभी बहस नहीं हुई. 'मैंने तुमसे कहा था' उनके शब्दकोश में नहीं था."