किसी भी परिवार में शादी का अवसर बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन कई बार अनजाने में की गई छोटी गलतियां भी विवाह में बाधाएं खड़ी कर देती हैं। हिंदू परंपराओं में विवाह के निमंत्रण पत्र छपने के बाद उन्हें किस क्रम में और सबसे पहले किन्हें देना चाहिए, इसका विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि सही व्यक्तियों और देवताओं को पहले निमंत्रण देने से विवाह बिना किसी विघ्न के सफलतापूर्वक संपन्न होता है।
सबसे पहले निमंत्रण भगवान गणेश को क्यों दिया जाता है
हिंदू परंपराओं में माना जाता है कि किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत विघ्नहर्ता भगवान गणेश के आशीर्वाद के बिना नहीं होती। इसलिए विवाह का पहला निमंत्रण गणेश जी को अर्पित किया जाता है। आमतौर पर लोग शादी का कार्ड घर में रखी गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने समर्पित करते हैं ताकि पूरे आयोजन में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।
विष्णु-लक्ष्मी को दूसरा निमंत्रण देने की मान्यता
विवाह को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है, जिसके लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। विवाह का दूसरा निमंत्रण इन्हें दिया जाता है ताकि दांपत्य जीवन सुख, समृद्धि और सौभाग्य से भरा रहे। यह आस्था वर्षों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है।
हनुमान जी को निमंत्रण देकर नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
तीसरा निमंत्रण हनुमान जी को देने की परंपरा है। मान्यता है कि हनुमान जी की कृपा से विवाह के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा पास नहीं आती। लोग विवाह पत्रिका को मंदिर में ले जाकर या घर में हनुमान जी के समक्ष रखकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कुलदेवी-कुलदेवता और पितरों को न्योता देना शुभ माना जाता है
परिवार के कुलदेवता या कुलदेवी को चौथा निमंत्रण देना अनिवार्य माना जाता है। माना जाता है कि उनके आशीर्वाद के बिना मंगलकार्य पूर्ण नहीं होता। इसके बाद पाँचवाँ निमंत्रण पितरों को दिया जाता है। पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए शादी का कार्ड पीपल के पेड़ के नीचे रखने की परंपरा भी कई जगहों पर प्रचलित है।