पश्चिम बंगाल सरकार ने शराब बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि अब राज्य में स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के एक किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों को अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार के इस फैसले को सामाजिक और शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
स्कूल और मंदिरों पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कल्याणी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि बच्चों की पढ़ाई और धार्मिक स्थलों के आसपास सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि इससे स्कूल और कॉलेज के आसपास भीड़भाड़ और अवांछित गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
महिलाओं के लिए भी बड़ा ऐलान
सरकार ने केवल शराब नीति पर ही नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भी एक नई योजना की घोषणा की है। अन्नपूर्णा योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया 27 मई से शुरू होने की जानकारी दी गई है।
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सस्ते भोजन की योजना भी
मुख्यमंत्री ने गरीबों को ध्यान में रखते हुए एक और बड़ी घोषणा की। पूरे राज्य में 400 विशेष कैंटीन शुरू की जाएंगी, जहां लोगों को मात्र 5 रुपये में मछली और चावल का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को राहत देना है।
पहले भी बने हैं ऐसे नियम
देश के कई राज्यों में शराब बिक्री को लेकर अलग-अलग नियम लागू हैं। बिहार, गुजरात, मिजोरम और नागालैंड जैसे राज्यों में पूर्ण शराबबंदी लागू है। वहीं पहले उच्चतम न्यायालय भी राजमार्गों के आसपास शराब बिक्री को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है।
नीति पर अब नजरें
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि इस फैसले को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है। सरकार के इस कदम को सामाजिक सुधार और सार्वजनिक व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है।