पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर ली है, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। इसी वजह से बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या बंगाल को योगी मॉडल जैसा सख्त चेहरा मिलेगा या फिर पार्टी किसी महिला नेता पर दांव लगाएगी।
अमित शाह के हाथ में पूरी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री चयन के लिए पार्टी ने अमित शाह को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है, जबकि मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों नेता विधायकों और संगठन के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, संभावित चेहरों की ताकत और कमजोरियों पर अलग-अलग रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बीजेपी सिर्फ सरकार नहीं बनाना चाहती, बल्कि बंगाल में लंबे समय तक मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
शुभेंदु सबसे मजबूत दावेदार
शुभेंदु अधिकारी का नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। उन्होंने पहले नंदीग्राम में और अब भवानीपुर में बड़ी जीत दर्ज कर अपनी ताकत दिखाई है। बंगाल में बीजेपी की जीत के पीछे उन्हें बड़ा चेहरा माना जा रहा है। लेकिन पार्टी के भीतर एक वर्ग ऐसा भी है जो उनके पुराने टीएमसी बैकग्राउंड को लेकर सवाल उठा रहा है। कुछ नेताओं का मानना है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया तो पुराने बीजेपी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ सकती है।
लेडी योगी की भी चर्चा तेज
मुख्यमंत्री पद की चर्चा में कई और नाम भी तेजी से उभर रहे हैं। दिलीप घोष, शमिक भट्टाचार्य और स्वपन दासगुप्ता जैसे नेताओं के नाम लगातार चर्चा में हैं। वहीं महिला चेहरे की बात करें तो अग्निमित्रा पॉल को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा बढ़ रही है। कई नेता उन्हें बंगाल की ‘लेडी योगी’ कहकर प्रचारित कर रहे हैं।
इसे भी पढ़ें : कोलकाता न्यू मार्केट में आधी रात बुलडोजर कार्रवाई: TMC दफ्तर ढहाने पर सियासी संग्राम तेज
योगी मॉडल की चर्चा क्यों?
बंगाल में चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और घुसपैठ जैसे मुद्दे बड़े केंद्र में रहे। इसी वजह से बीजेपी समर्थकों के बीच अब ‘योगी मॉडल’ की चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग खुलकर सख्त प्रशासन और बुलडोजर मॉडल की मांग करते दिख रहे हैं। पार्टी भी ऐसा चेहरा चाहती है जो मजबूत संदेश दे सके और प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखा सके।
आखिरी वक्त पर बड़ा सरप्राइज संभव
बीजेपी पहले भी कई राज्यों में चौंकाने वाले फैसले ले चुकी है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ, राजस्थान में भजनलाल शर्मा और मध्य प्रदेश में मोहन यादव जैसे फैसले अचानक सामने आए थे। यही वजह है कि बंगाल में भी आखिरी समय तक तस्वीर बदल सकती है। अब सबकी नजर 9 मई के शपथ ग्रहण पर टिकी है, जहां यह साफ होगा कि बंगाल की कमान आखिर किसके हाथ में जाएगी।