पश्चिम बंगाल की राजनीति और आगामी चुनावी तैयारियों के बीच मतदाता सूची को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2026 के तहत राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। यह कार्रवाई मतदाता सूची को पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से की गई है, ताकि केवल पात्र मतदाता ही चुनावी प्रक्रिया में शामिल हों।
SIR 2026 के तहत क्यों हुई बड़ी कार्रवाई
चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण जरूरी माना जाता है। इसी कड़ी में SIR 2026 के तहत पश्चिम बंगाल में व्यापक स्तर पर सत्यापन अभियान चलाया गया। इसमें घर-घर सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और डाटा मिलान के बाद अपात्र या संदिग्ध प्रविष्टियों को ड्राफ्ट सूची से हटाया गया।
किन कारणों से हटाए गए नाम
जारी आंकड़ों के अनुसार, हटाए गए नामों के पीछे कई कारण सामने आए हैं।
मृत मतदाता: सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिनका निधन हो चुका है।
स्थानांतरित मतदाता: बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता पाए गए जो राज्य या निर्वाचन क्षेत्र बदल चुके हैं।
लापता मतदाता: जिनकी वर्तमान स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी।
डुप्लीकेट प्रविष्टियां: एक ही व्यक्ति के नाम से एक से अधिक एंट्री।
अन्य कारण: पात्रता से जुड़ी विसंगतियां या अधूरी जानकारी।
आंकड़ों पर एक नजर
SIR ड्राफ्ट सूची से कुल 58,20,898 नाम हटाए गए हैं।
मृत पाए गए: 24,16,852
स्थानांतरित: 19,88,076
लापता: 12,20,038
डुप्लीकेट: 1,38,328
अन्य कारण: 57,604
मतदाताओं को मिला आपत्ति का अवसर
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल ड्राफ्ट सूची है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो वह निर्धारित समय सीमा में आपत्ति दर्ज कर सकता है। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि किसी का भी मताधिकार प्रभावित न हो।
पारदर्शिता पर आयोग का जोर
आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी है। अंतिम मतदाता सूची आपत्तियों के निपटारे के बाद ही जारी की जाएगी, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा मजबूत बना रहे।