अप्रैल 2026 में उत्तर भारत का मौसम चौंकाने वाला मोड़ ले चुका है। जहां इस समय तेज गर्मी होनी चाहिए, वहां फरवरी जैसी ठंड, बारिश और ओले देखने को मिल रहे हैं। तापमान सामान्य से 8 से 15 डिग्री तक नीचे पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इसके पीछे लगातार सक्रिय हो रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, अरब सागर की नमी और आर्कटिक में हो रहे बदलावों का बड़ा असर है।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का ‘डबल डोज’
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मार्च और अप्रैल के शुरुआती दिनों में कुल 8 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय रहे। आमतौर पर ये सिस्टम सर्दियों तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस बार लगातार एक के बाद एक सक्रिय होकर मौसम को पूरी तरह बदल रहे हैं। 7-8 अप्रैल को इनकी गतिविधि चरम पर रही, जिससे कई राज्यों में तेज बारिश और ओले गिरे।
अरब सागर की नमी ने बढ़ाई ताकत
इस बार सिर्फ वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ही नहीं, बल्कि अरब सागर से आ रही नम हवाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है। राजस्थान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने इन हवाओं को उत्तर भारत की ओर खींचा। जब ठंडी और नम हवाएं टकराईं, तो भारी बादल बने, गरज-चमक बढ़ी और ओलावृष्टि हुई। यही वजह है कि मौसम सामान्य से ज्यादा ठंडा और अस्थिर हो गया।
आर्कटिक की गर्मी का दूरगामी असर
वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे जेट स्ट्रीम में बदलाव आया है। पहले यह सीधी बहती थी, लेकिन अब इसमें लहरदार पैटर्न बनने लगा है। इस बदलाव के कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अब ज्यादा दक्षिण की ओर और लंबे समय तक सक्रिय रह रहे हैं, जिससे अप्रैल में भी सर्दी जैसे हालात बन गए हैं।
तापमान में भारी गिरावट, फसलों पर असर
उत्तर भारत के कई हिस्सों में दिन का तापमान 19 से 26 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में बारिश और ओलों ने रबी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। वहीं पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ बर्फबारी भी दर्ज की जा रही है, जिससे ठंड और बढ़ गई है।
आगे क्या कहता है मौसम विभाग?
मौसम विभाग के अनुसार 9 से 11 अप्रैल के बीच एक और नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय हो सकता है। इसके चलते बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। हालांकि इसके बाद धीरे-धीरे तापमान बढ़ने और मौसम के सामान्य होने की उम्मीद जताई गई है।