Lifestyle News : व्हेल को आम बोलचाल में “व्हेल मछली” कहा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह मछली नहीं बल्कि स्तनधारी जीव है. इसलिए व्हेल अपने बच्चे को दूध पिलाती है. हाल ही में सोशल मीडिया पर व्हेल के बच्चे के दूध पीने का एक वीडियो काफी वायरल हुआ था. हालांकि, फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार उस वीडियो को असली फुटेज नहीं, बल्कि AI से बनाया गया वीडियो बताया गया.
व्हेल का दूध कैसा होता है?
व्हेल का दूध इंसानों या गाय के दूध जैसा पतला नहीं होता। इसमें वसा की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे दूध गाढ़ा रहता है और पानी में जल्दी घुलता नहीं है. ब्लू व्हेल के दूध में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक वसा बताई गई है। यही पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर दूध बच्चे की बहुत तेज वृद्धि में मदद करता है.
पानी के अंदर बच्चे को कैसे दूध पिलाती है?
व्हेल के शरीर पर स्तन ग्रंथियां त्वचा की तहों के अंदर होती हैं। बच्चा मां के पास जाकर इन हिस्सों को मुंह से पकड़ता है. मां अपनी मांसपेशियों की मदद से दूध को सीधे बच्चे के मुंह में पहुंचाती है. यानी इंसानों की तरह बच्चे को लंबे समय तक दूध खींचना नहीं पड़ता। दूध गाढ़ा होने के कारण समुद्री पानी में तुरंत फैलकर गायब भी नहीं हो जाता.
एक दिन में बच्चे का वजन कितना बढ़ता है?
ब्लू व्हेल का बच्चा जन्म के समय करीब 2,500 किलोग्राम का हो सकता है. दूध पीने के दौरान उसका वजन लगभग 90 किलोग्राम प्रतिदिन बढ़ सकता है। कुछ स्रोतों में यह वृद्धि 100 किलोग्राम से अधिक प्रतिदिन भी बताई गई है। वह रोज लगभग 200 लीटर या उससे अधिक दूध पी सकता है.
इतनी तेज वृद्धि क्यों जरूरी है?
तेजी से बढ़ना बच्चे के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि उसे ठंडे समुद्री पानी में शरीर का तापमान बनाए रखना, तैरना और आगे लंबी समुद्री यात्रा के लिए पर्याप्त ऊर्जा जुटानी होती है. यही कारण है कि व्हेल का दूध बेहद गाढ़ा और वसा से भरपूर होता है.