Iran want from the US: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक महत्वपूर्ण वार्ताओं का दौर जारी रहेगा। इस अवधि में उन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी जिन पर अब तक पूर्ण सहमति नहीं बन सकी है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड में शुरुआती दौर की बातचीत हो चुकी है और एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर भी सहमति बनी है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान सात प्रमुख मांगों को लेकर अमेरिका से स्पष्ट समझौता चाहता है।
सैन्य कार्रवाई रोकने की सबसे बड़ी मांग
ईरान की पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग अमेरिका और इजरायल की सभी सैन्य गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करने की है। उसका कहना है कि स्थायी शांति और भरोसेमंद वार्ता तभी संभव है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव पूरी तरह खत्म हो। ईरान का मानना है कि लगातार सैन्य दबाव के बीच किसी भी समझौते का स्थायी समाधान निकलना मुश्किल है।
नुकसान की भरपाई और प्रतिबंधों से राहत
ईरान का दावा है कि हाल के वर्षों में उसे भारी आर्थिक और बुनियादी ढांचे का नुकसान हुआ है। इसलिए वह पुनर्निर्माण और क्षतिपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है। इसके साथ ही तेहरान चाहता है कि उस पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त किए जाएं। ईरान का तर्क है कि आंशिक राहत पर्याप्त नहीं होगी और सामान्य आर्थिक संबंधों के लिए प्रतिबंधों का पूर्ण हटना जरूरी है।
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दा
ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अपनी संप्रभु भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाना चाहता है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सभी विवादों का स्थायी समाधान चाहता है, ताकि भविष्य में इस मुद्दे को राजनीतिक या कूटनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल न किया जा सके।
रणनीतिक धैर्य और सूचना युद्ध पर जोर
ईरान का मानना है कि बातचीत के दौरान जल्दबाजी दिखाना उसके हितों के खिलाफ हो सकता है। इसलिए वह चरणबद्ध और संतुलित वार्ता प्रक्रिया पर जोर दे रहा है। साथ ही ईरान का कहना है कि कूटनीतिक वार्ताओं के साथ-साथ सूचना और जनमत के स्तर पर भी संघर्ष चलता है। ऐसे में प्रभावी मीडिया रणनीति और निगरानी व्यवस्था के जरिए अपने पक्ष को मजबूत रखना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।