नई दिल्ली का तिब्बत पर रुख 'अस्पष्ट' नहीं, 'रणनीतिक रूप से कैलकुलेटेड अस्पष्टता' है। ये अस्पष्टता ही भारत का सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक हथियार है। 2003 में अटल सरकार ने तिब्बत को 'चीन का हिस्सा' माना था। 1954 में पंचशील समझौते में भी तिब्बत को चीन का स्वायत्त क्षेत्र माना गया।
1 लाख+ तिब्बती शरणार्थी भारत में हैं
1959 से दलाई लामा और 1 लाख+ तिब्बती शरणार्थी भारत में हैं। धर्मशाला में 'निर्वासित तिब्बती सरकार' चलती है। भारत इसे मान्यता नहीं देता, पर रोकता भी नहीं। स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) में 10,000+ तिब्बती सैनिक हैं। 2020 गलवान के बाद पैंगोंग में SFF ने ही ऊंची चोटियां कब्जाई थीं। चीन कहता है अगला दलाई लामा वो चुनेगा। भारत ने दलाई लामा के बयान- "मेरा उत्तराधिकारी भारत में पैदा होगा, चीन का चुना हुआ मान्य नहीं" पर चुप्पी साध ली। न समर्थन, न विरोध। चीन अरुणाचल को 'दक्षिण तिब्बत' कहता है। भारत दलाई लामा को तवांग भेजता है, पर सरकारी बयान में 'धार्मिक यात्रा' बताता है, राजनीतिक नहीं। चीन ने 2020 से कैलाश यात्रा बंद कर रखी है। भारत ने दबाव नहीं बनाया, लेकिन लिपुलेख लिंक रोड बनाकर साफ किया कि तीर्थयात्रा उसका हक है। जब चीन CPEC, POK या J&K पर बोलता है, तो भारत तिब्बत कार्ड निकाल लेता है। विदेश मंत्रालय का बयान - "J&K पर टिप्पणी का हक नहीं, CPEC अवैध"- इसी रणनीति का हिस्सा है।
LAC पर 50,000+ सैनिक तैनात
अगर भारत खुलकर 'फ्री तिब्बत' का समर्थन करे, तो चीन इसे युद्ध की घोषणा मान लेगा। 1962 दोहराया जा सकता है। अभी LAC पर 50,000+ सैनिक तैनात हैं।तिब्बतियों का विश्वास: खुला समर्थन न देकर भारत ने 1 लाख तिब्बतियों को सुरक्षित रखा है। अगर भारत 'वन चाइना' से पलटे, तो चीन शरणार्थियों को वापस मांग सकता है।
चीन क्या चाहता है?
चीन चाहता है भारत दलाई लामा को राजनीतिक गतिविधियों से रोके। 2008 में मनमोहन सरकार ने दलाई लामा के दिल्ली में कार्यक्रम रद्द करवा दिए थे।'तिब्बत कार्ड' खत्म हो: 2024 में जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल दलाई लामा से मिला, तो चीन ने भारत से विरोध दर्ज कराने को कहा। भारत चुप रहा।
सीमा की गारंटी:
चीन अरुणाचल को मान्यता चाहता है। बदले में अक्साई चिन पर दावा छोड़ने को तैयार है। भारत को डर है कि तिब्बत पर नरमी दिखाने से अरुणाचल कमजोर पड़ेगा।5. आगे क्या? मोदी 3.0 का रुख'तिब्बत' शब्द से परहेज: मोदी सरकार सरकारी दस्तावेजों में 'तिब्बत' शब्द से बचती है। 'हिमालयी क्षेत्र' बोलती है। लेकिन बॉर्डर इंफ्रा दोगुनी गति से बना रही है।सांस्कृतिक कूटनीति: भारत बौद्ध विरासत को आगे बढ़ा रहा है - कुशीनगर एयरपोर्ट, बौद्ध सर्किट। ये चीन के 'सिनिसाइजेशन ऑफ तिब्बत' का जवाब है।