
राहु काल का समय हर दिन सूर्योदय के मुताबिक बदलता रहता है। राहुकाल को लोग अशुभ मानते हैं और इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं। आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि राहुकाल क्या होता है, इसमें क्या नहीं करना चाहिए। हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल दिन का वह समय है जिसे अशुभ माना जाता है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच लगभग डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट का होता है। मान्यता है कि इस दौरान शुरू किए गए कार्य सफल नहीं होते, या फिर बाधाओं से घिरे रहते हैं। जिस तरह भद्रा और पंचक को शुभ नहीं माना जाता, ठीक वैसे ही राहुकाल को भी अशुभ समय कहा गया है।
राहुकाल का समय कब होता है?
राहु काल का समय हर दिन सूर्योदय के मुताबिक बदलता रहता है। राहु काल में कोई भी नया और शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है। अगर कोई कार्य बहुत जरूरी हो, तो उसे टाल देना चाहिए या घर से निकलने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए?
नए काम की शुरुआत: इस समय नया व्यापार, योजना या नौकरी से जुड़ा कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे कार्य राहुकाल में नहीं किए जाते।
यात्रा न करें:- अगर हो तो राहु काल में यात्रा टाल देनी चाहिए।
खरीद-बिक्री से बचें:- राहुकाल में वाहन, मकान, गहने या अन्य सामान खरीदने से बचें, क्योंकि इससे हानि हो सकती है।
यज्ञ और हवन न करें:- राहुकाल के दौरान यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान नहीं करने चाहिए।
बड़े फैसले: जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने से परहेज करना चाहिए।
राहुकाल में क्या कर सकते हैं?
राहुकाल के दौरान भक्ति, ध्यान और आध्यात्मिक साधना करना उत्तम माना जाता है।
भगवान शिव और काल भैरव की पूजा करनी चाहिए।
राहुकाल में भक्ति, ध्यान और आध्यात्मिक साधना।
राहुकाल में मृत्यु से जुड़े कर्मकांड और श्राद्ध कर्म।
राहुकाल में पहले से चल रहे किसी कार्य को जारी रख सकते हैं।
राहुकाल से बचने के उपाय
अगर राहुकाल में यात्रा या जरूरी कार्य करना ही पड़े तो कुछ उपाय बताए गए हैं—
राहु मंत्र “ॐ रां राहवे नमः” का जाप करें।
घर से निकलने से पहले दही-चीनी या कुछ मीठा खाएं।
घर से निकलते समय कुछ कदम उल्टे चलें।
हनुमान चालीसा का पाठ कर हनुमान जी का आशीर्वाद लें।