Asian Games: जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे एशियन गेम्स 2026 के मेडल सिर्फ खिलाड़ियों की जीत का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक खास सोच और संदेश भी छिपा है। मेडल का डिजाइन सामने आने के बाद खेल प्रेमियों के बीच इसकी खूब चर्चा हो रही है। आयोजकों ने इसे एशिया की एकता, विविधता और खिलाड़ियों के संघर्ष को ध्यान में रखकर तैयार कराया है।
जापानी डिजाइनर ने तैयार किया खास डिजाइन
एशियन गेम्स 2026 के मेडल का डिजाइन जापान के प्रसिद्ध डिजाइनर डाइसुके शीबा ने तैयार किया है। उनका डिजाइन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के जरिए चुना गया था। यह डिजाइन खेलों के आधिकारिक नारे “इमेजिन वन एशिया” और “विविधता में एकता” की भावना को दर्शाता है। डिजाइनर का मानना है कि अलग-अलग संस्कृतियों और देशों के खिलाड़ी जब एक मंच पर आते हैं तो वह एशिया की एकता का सबसे बड़ा प्रतीक बनते हैं।
संघर्ष और सफलता की कहानी बताता है मेडल
डाइसुके शीबा ने मेडल तैयार करने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने कई सिरेमिक डिस्क को तोड़कर उनके टुकड़ों का अध्ययन किया। उनका मानना है कि हर खिलाड़ी का सफर भी कुछ ऐसा ही होता है। मेहनत, असफलता, चोट और संघर्ष के कई टुकड़े मिलकर अंत में सफलता का मेडल बनाते हैं। यही विचार इस डिजाइन की सबसे बड़ी खासियत माना जा रहा है।
रिसाइकिल ई-कचरे से बने मेडल
इन मेडल्स की एक और बड़ी खासियत यह है कि इन्हें पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाया गया है। जापान के विभिन्न नगर निकायों से जुटाए गए पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे से धातु निकालकर मेडल तैयार किए गए हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के पुनः उपयोग का संदेश भी दिया गया है। आयोजकों ने इसे भविष्य के खेल आयोजनों के लिए एक उदाहरण बताया है।
रिबन और बॉक्स भी हैं खास
मेडल के रिबन पर आइची प्रांत के आधिकारिक फूल ‘काकित्सुबाता’ की आकृति बनाई गई है। इसका डिजाइन खिलाड़ियों की ताकत और लचीलेपन का प्रतीक माना गया है। वहीं मेडल रखने के लिए बनाया गया बॉक्स जापान की प्रसिद्ध ‘हिनोकी’ लकड़ी से तैयार किया गया है। यह जापान की पारंपरिक संस्कृति और शिल्पकला को भी दर्शाता है।
वजन और आकार भी जानिए
सभी मेडल 8 सेंटीमीटर व्यास और 5 मिलीमीटर मोटाई के बनाए गए हैं। गोल्ड मेडल का वजन लगभग 265 ग्राम है, जिसमें चांदी पर सोने की परत चढ़ाई गई है। सिल्वर मेडल करीब 264 ग्राम का है, जबकि ब्रॉन्ज मेडल लगभग 222 ग्राम का है। कुल मिलाकर एशियन गेम्स 2026 का यह मेडल सिर्फ जीत का प्रतीक नहीं, बल्कि एशिया की एकता, पर्यावरण संरक्षण और खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानी भी अपने भीतर समेटे हुए है।
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