Liver Diseases: खराब खानपान और गलत जीवनशैली के कारण आज के समय में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही है, जिनमें फैटी लिवर की समस्या सबसे आम हो गई है। लिवर पर फैट बढ़ने से ये समस्या होती है। हालांकि फैटी लिवर को लिवर खुद ही ठीक कर सकता है, लेकिन एक ऐसा स्टेज आता है, जिसके बाद लिवर को भी ठीक करने का मौका नहीं मिलता है। तो आइए जानते हैं इस स्टेज को क्या कहते हैं और लिवर कैसे काम करता है।
लिवर की खासियत
हमारे शरीर में लिवर एक ऐसा अंग है, जिसमें खुद को दोबारा बनाने की अनोखी ताकत होती है। मेडिकल भाषा में इसे 'लिवर रीजनरेशन' कहते हैं। अगर सर्जरी के दौरान लिवर का कुछ हिस्सा निकाल दिया जाए या किसी बीमारी से कुछ कोशिकाएं नष्ट हो जाएं, तो स्वस्थ कोशिकाएं दोबारा बढ़कर लिवर को उसके सामान्य आकार और क्षमता में ले आती हैं।जब कोई इंसान लिवर डोनेट करता है, तो कुछ ही महीनों में उसका लिवर भी वापस पहले जैसा ही हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लिवर हर तरह के नुकसान से पूरी तरह उबर सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि नुकसान कितना बड़ा है और बीमारी किस स्टेज पर पहुंच चुकी है।
लिवर खराब होने के शुरुआती लक्षण
जब खानपान या गलत आदतों के कारण लिवर लगातार खराब होता रहता है और हम इस पर ध्यान नहीं देते हैं, तो लिवर में सूजन आ जाती है। ऐसा लंबे समय तक चलने पर लिवर में कोलेजन जमा होने लगता है, जिससे स्वस्थ टिश्यू की जगह निशान जैसे सख्त टिश्यू बनने लगते हैं। लिवर की इस शुरुआती स्थिति को लिवर फाइब्रोसिस कहा जाता है। अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो यह आगे चलकर और खतरनाक रूप ले लेता है और सिरोसिस बन जाता है।
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क्या होता है लिवर सिरोसिस
जब फाइब्रोसिस बढ़ने पर लिवर में बहुत ज्यादा निशान बन जाते हैं और उसकी सामान्य बनावट पूरी तरह बिगड़ जाती है, तो उसे लिवर सिरोसिस करते हैं। इस स्टेज में निशान वाले टिश्यू लिवर के सामान्य कामकाज में भारी रुकावट पैदा करते हैं। सिरोसिस होने पर पेट में पानी भरना, खून की उल्टी होना, शरीर से आसानी से खून बहना और दिमाग के कामकाज पर बुरा असर पड़ने जैसी गंभीर समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यह वह स्थिति है, जब लिवर बुरी तरह से डैमेज हो जाता है और कई बार मरीज की जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ जाती है। इसलिए शुरूआती फैटी लिवर की स्टेज पर ही अपने खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार करना बेहद जरूरी है।