Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर के कलश पर फहराई जाने वाली ध्वजा की विशेषताएं इस प्रकार हैं:ध्वजा का रंग गहरा केसरिया (भगवा) होगा, जो सनातन परंपरा में त्याग, शौर्य, बलिदान, भक्ति, ज्ञान और सत्य का प्रतीक माना जाता है। यह रंग रामभक्तों, साधु-संतों और पूर्वजों के बलिदान का प्रतिनिधित्व करता है। ध्वजा की लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट है। यह 42 फीट ऊंचे ध्वज-दंड पर 360 डिग्री घूमने की व्यवस्था के साथ स्थापित किया जाएगा।
अयोध्या के सूर्यवंशी राजाओं का राजचिह्न
ध्वजा विशेष पैराशूट फैब्रिक और रेशमी धागों से बना है ताकि यह सूर्य, बारिश और तेज हवा जैसे प्राकृतिक प्रभावों से सुरक्षित रहे और लंबे समय तक टिकाऊ हो। ध्वजा पर इक्ष्वाकु वंश और रघुकुल की हजारों वर्ष पुरानी परंपराओं के चिह्न उकेरे गए हैं। इनमें प्रमुख हैं कोविदार (कचनार) वृक्ष, जो अयोध्या के सूर्यवंशी राजाओं का राजचिह्न है। ध्वजा पर "ॐ" कार और भगवान सूर्य की आकृति भी अंकित हैं, जो श्रीराम के सूर्यवंशी होने का प्रतीक है।
ध्वजा 10 सेकंड के भीतर हवा में लहराना शुरू करेगी
शिखर पर यह ध्वजा स्थापित होने के बाद मंदिर और आसपास का क्षेत्र पवित्र माना जाएगा तथा इसे देखने से दूर से ही रामराज्य की पुनर्स्थापना का संकेत मिलेगा। ध्वजा फहराने की रस्म वेद मंत्रों के साथ की जाएगी और इस दौरान मंदिर परिसर में घंटा-घड़ियाल बजेंगे। इस ध्वज को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को शिखर पर फहराएंगे, यह समारोह आधुनिक ऑटोमैटिक फ्लैग होस्टिंग सिस्टम द्वारा होगा, जिससे ध्वजा 10 सेकंड के भीतर हवा में लहराना शुरू करेगी।
ध्वज का कुल वजन लगभग 11 किलो
ध्वज का कुल वजन लगभग 11 किलो है और इसे विशेष डबल कोटेड सिंथेटिक लेयर से बनाया गया है ताकि तापमान, नमी और तेज हवा से सुरक्षा हो सके। यह ध्वजा केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि रामलला की पूर्ण विराजमान होने का प्रतीक, सैकड़ों वर्षों की तपस्या और बलिदान का ज्ञापक तथा अयोध्या में पुनः रामराज्य की स्थापना का दिव्य संकेत है। इस प्रकार, राम मंदिर के कलश पर फहराई जाने वाली यह ध्वजा धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक है।