ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में 'G2' यानी अमेरिका-चीन को लेकर चर्चा तेज है। ट्रंप और शी जिनपिंग की नजदीकियां, टैरिफ में नरमी और दुनिया को 2 हिस्सों में बांटने की बात ने भारत की टेंशन बढ़ा दी है। 2005 में अमेरिकी अर्थशास्त्री फ्रेड बर्गस्टन ने कहा था कि अमेरिका-चीन मिलकर दुनिया चला सकते हैं। ट्रंप अब इसी राह पर हैं। अगर US चीन को एशिया का मैनेजर मान ले, तो भारत का क्षेत्रीय प्रभाव कम होगा। चीन की दादागिरी बढ़ेगी।
क्या है QUAD?
भारत ने US-जापान-ऑस्ट्रेलिया के साथ QUAD को चीन के खिलाफ बनाया। US-चीन साथ आए तो QUAD की प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी। एक्सपर्ट का कहना है, "QUAD सैन्य मंच से बदलकर सिर्फ टेक-सप्लाई चेन का मंच बन सकता है।' एक्सपर्ट मीरा शंकर बोलीं- "G2 से दुनिया 'प्रभाव वाले क्षेत्रों' में बंटेगी। इससे भारत की प्रतिष्ठा और QUAD की व्यवहार्यता दोनों को चुनौती मिलेगी।"
ट्रंप की टीम में भी डर
ट्रंप की नई नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटिजी (NSS) में 'हिंद-प्रशांत' शब्द का इस्तेमाल किया गया है और भारत को QUAD में काम करने के लिए प्रोत्साहित करने की बात है। इससे G2 बनाने की आशंका कम हुई है। US-चीन द्विध्रुवीय दुनिया असंतुलित अवधारणा है। दुनिया अब इससे आगे बढ़ चुकी है। 2050 तक भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होगा, US तीसरे पर गिरेगा"। यानी स्थायी G2 की बजाय त्रिध्रुवीय दुनिया बनेगी।
4 लाइन की रणनीति शुरू कर दी
भारत ने G2 के खतरे को भांपकर 4 लाइन की रणनीति शुरू कर दी। भारत ने EU के साथ दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता किया। ब्राजील से 2030 तक 30 अरब डॉलर व्यापार का टारगेट रखा है। G2 का सबसे बड़ा खतरा भारत और EU को होगा।भारत US पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा। चीन से सीधे सीमा विवाद सुलझाएगा"। भारत-जापान-ऑस्ट्रेलिया-यूरोप मिलकर "लचीला नेटवर्क" बना रहे हैं। अगर US-चीन डील होती है तो "चीन प्लस वन" रणनीति कमजोर पड़ेगी। इसलिए भारत को सप्लाई चेन, लेबर रिफॉर्म तेज करने होंगे। इसके साथ AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा "ये आने वाले समय की वास्तविक सीमाएं होंगी"।