
भारत का गगनयान मिशन अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। इसरो चीफ वी. नारायणन के अनुसार, मिशन का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस मिशन के तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की सतह से 400 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में भेजा जाएगा। इसरो ने हाल ही में गगनयान मिशन के लिए पैराशूट आधारित मंदन प्रणाली के संपूर्ण प्रदर्शन के तहत पहला Integrated Air Drop Test (IADT-01) सफलतापूर्वक पूरा किया है।
इसरो प्रमुख का कहा, “गगनयान मिशन बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. हमने सभी जरूरी तकनीकों को विकसित कर लिया है. रॉकेट का ह्यूमन रेटिंग प्रोसेस, ऑर्बिटल मॉड्यूल की डिजाइन और पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली लगभग पूरा होने के करीब है.” उन्होंने यह बयान इमरजिंग साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कॉनक्लेव (ESTIC-2025) कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान दिया गया.
गगनयान मिशन की खास बातें
गगनयान मिशन का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अंतिम परीक्षण अभी जारी है। गगनयान को 2025-26 में भेजने की तैयारी चल रही है। पहला मानव रहित मिशन दिसंबर 2025 में लॉन्च हो सकता है। तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा जाएगा। यह मिशन पृथ्वी की सतह से 400 किलोमीटर ऊपर है। मिशन की समस सीमा तीन दिन की है। इसका बजट 20,193 करोड़ रुपये है।
इसरो की क्या हैं तैयारियां
पैराशूट परीक्षण अब तक सफलतापूर्वक पूरा किया गया जा चुका है। क्रू मॉड्यूल का परीक्षण जारी है। रॉकेट के लिए GSLV Mk III का संशोधित संस्करण उपयोग में लाया जाएगा। अंतरिक्ष यात्रियों में चार पायलट चुने गए। इनका प्रशिक्षण जारी है।
‘मेड इन इंडिया’ स्पेस टेक्नोलॉजी की ये है ताकत
गगनयान मिशन पूरी तरह से भारतीय विशेषज्ञता पर आधारित रहा है। इसमें इसरो के साथ देश की कई औद्योगिक इकाइयां और अनुसंधान संस्थान भी जुड़े हुए हैं। कुछ आधुनिक टेक्नोलॉजी की सहायता अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से ली गई है. मगर मिशन का मूल ढांचा स्वदेशी है. यह मिशन भारत की वैज्ञानिक क्षमता और ‘मेक इन इंडिया इन स्पेस’ के विजन का उदाहरण बन रहा है.