बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराए जाने के लगभग 18 महीनों के बाद गुरुवार को संसदीय चुनाव हुए। शुक्रवार को सामने आए परिणामों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। इससे साफ हो गया है कि बांग्लादेश में बीएनपी की बहुमत की सरकार बन रही है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि बीएनपी की सरकार आने के बाद बांग्लादेश के भारत और दक्षिण एशिया के साथ रिश्तों पर कैसा असर पड़ेगा।
भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव
बांग्लादेश की कमान बीएनपी के हाथों में आने के बाद दक्षिण एशिया में रणनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्या संबंध रहेंगे। शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से बांग्लादेश में यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन में भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव देखने को मिला।
आईएसआई की सक्रियता भी बढ़ी
इसके साथ ही बांग्लादेश में पाकिस्तान को एंट्री मिल गई। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में आईएसआई की सक्रियता भी बढ़ी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसका मकसद भारत के खिलाफ इन युवाओं का इस्तेमाल करना है।
कूटनीतिक संबंध बेहतर करने का प्रयास
जिस तरह से यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ दोस्ती में गहराई आई है, बीएनपी के आने से इसमें कुछ बदलाव देखने को जरूर मिलेगा। बीएनपी भारत के साथ अपने राजनयिक और कूटनीतिक संबंध बेहतर करने का प्रयास करेगी। बीएनपी की वापसी से दोनों देशों के बीच सीमा, अवैध आव्रजन और जल बंटवारे (जैसे तीस्ता) जैसे मुद्दे फिर प्रमुख बन सकते हैं।
खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का शासन
इससे पहले पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध काफी अच्छे थे। हालांकि, अवामी लीग से पूर्व जब खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का शासन था, तब भारत और बांग्लादेश के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। लेकिन, तारिक रहमान के हाथ में सत्ता की कमान होने के बाद इसमें थोड़ा बदलाव जरूर हो सकता है।