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दर्द में भी समर्पण : विश्व की विभिन्न जनजातियाँ अपने-अपने रीति-रिवाजों, जीवनशैली और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं. इनमें से कई परंपराएँ बेहद अनोखी और चौंकाने वाली होती हैं। ऐसी ही एक जनजाति है दानी जनजाति (Dani Tribe), जो इंडोनेशिया के पापुआ प्रांत के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती है. यह जनजाति न केवल अपने पारंपरिक रहन-सहन और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है, बल्कि एक ऐसी शोक प्रथा के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसे जानकर कोई भी व्यक्ति भावुक और स्तब्ध हो सकता है.
दानी जनजाति की यह परंपरा है कि जब परिवार का कोई सदस्य – जैसे पति, माता-पिता या भाई-बहन, मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उस दुख को व्यक्त करने के लिए महिलाएँ अपनी उंगलियों का एक हिस्सा कटवाती हैं। यह परंपरा उन्हें अपने गहरे शोक, प्रेम और सम्मान को दर्शाने का एक माध्यम लगती है। इसे वे "इकीपल" (Ikipalin) के नाम से जानते हैं। यह न केवल भावनात्मक पीड़ा की अभिव्यक्ति है, बल्कि उनके लिए यह एक आध्यात्मिक प्रक्रिया भी है, जिससे वे मानते हैं कि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है.
इस क्रिया को पारंपरिक तरीकों से अंजाम दिया जाता है. पहले उंगली के ऊपरी हिस्से को किसी नुकीले पत्थर या धारदार उपकरण से काटा जाता था। कभी-कभी इसे कसकर बाँधकर इतना सुन्न कर दिया जाता है कि रक्त का प्रवाह रुक जाए, फिर उसे काटा जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया अत्यंत पीड़ादायक होती है, फिर भी महिलाएँ इसे श्रद्धा और धैर्य के साथ सहन करती हैं. यह परंपरा मुख्यतः महिलाओं तक सीमित रही है, क्योंकि दानी समाज में महिलाओं को परिवार की देखभाल और भावनात्मक जुड़ाव का मुख्य स्रोत माना जाता है। पुरुषों में यह प्रथा बहुत कम या ना के बराबर देखी जाती है.
हालांकि, अब समय के साथ चीज़ें बदल रही हैं. इंडोनेशिया सरकार और सामाजिक संस्थाओं ने इस परंपरा को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए हैं, क्योंकि यह शारीरिक नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम लेकर आती है। वर्तमान में यह प्रथा लगभग समाप्ति की कगार पर है, और अब बहुत ही दुर्लभ मामलों में देखने को मिलती है.
दानी जनजाति की यह परंपरा हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि शोक, प्रेम और संबंधों को व्यक्त करने के तरीके अलग-अलग संस्कृतियों में कितने विविध हो सकते हैं. जहाँ आधुनिक समाज में दुख को शब्दों या रस्मों के माध्यम से जताया जाता है, वहीं कुछ जनजातियाँ अपने शरीर पर चोट पहुँचाकर अपनी भावना की गहराई दिखाती हैं। यह परंपरा चाहे जितनी भी कठोर क्यों न लगे, इसके पीछे भावनाओं का जो संसार छुपा है, वह वास्तव में अत्यंत गहन और मार्मिक है.