Health Alert : गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक बेहद खास और भावनात्मक दौर होता है. इस समय न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत सारे बदलाव आते हैं. प्रेग्नेंसी के दौरान सही खानपान, समय पर जांच और भरपूर आराम जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है एक्टिव रहना. कई बार महिलाएं यह सोचकर पूरा समय आराम करती हैं कि कहीं ज़्यादा चलने-फिरने से बच्चे को नुकसान न हो, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार एक्टिव रहना मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है.
प्रेग्नेंसी में हर तिमाही (trimester) का अपना महत्व होता है, लेकिन दूसरी तिमाही यानी 4 से 6 महीने का समय सबसे बेहतर होता है एक्टिव रहने के लिए. इस समय तक गर्भ ठहर चुका होता है, मॉर्निंग सिकनेस कम हो जाती है, शरीर थोड़ा सहज महसूस करता है और ऊर्जा का स्तर पहले से बेहतर होता है. ऐसे में हल्की-फुल्की वॉक, प्रेग्नेंसी योगा, स्ट्रेचिंग और घर के हल्के काम करने से शरीर फिट रहता है और प्रसव के समय दिक्कतें कम होती हैं.
हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि एक्टिव रहने का मतलब ज़ोरदार एक्सरसाइज या भारी काम नहीं है. हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है, इसलिए कोई भी गतिविधि शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें. जिन महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी होती है या जिन्हें ब्लीडिंग, लो प्लेसेंटा, प्रीमैच्योर लेबर या अन्य जटिलताएं हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
तीसरी तिमाही (7वां से 9वां महीना) में भी एक्टिव रहना फायदेमंद होता है, लेकिन तब शरीर भारी हो जाता है और थकान जल्दी महसूस होती है, इसलिए धीमी गति से चलना, गहरी सांस लेना, हल्की एक्सरसाइज आदि अपनानी चाहिए.
अंत में, एक्टिव रहने से न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि मूड भी अच्छा रहता है, स्ट्रेस कम होता है और डिलीवरी भी सामान्य होने की संभावना बढ़ जाती है. याद रखें, एक्टिव मां का मतलब है हेल्दी बेबी.