अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने पर पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल बना हुआ है कि परमा एकादशी आज मनाई जाएगी या कल। ऐसे में तिथि और पारण के सही समय की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।
परमा एकादशी का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में अधिकमास की परमा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, जप और दान का विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि परमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सांसारिक कष्टों से भी राहत मिलती है। यही कारण है कि भक्त इस दिन पूरे श्रद्धाभाव से उपवास रखते हैं।
तिथि को लेकर क्यों होता है भ्रम?
एकादशी व्रत की तिथि का निर्धारण सूर्योदय और तिथि के संयोग के आधार पर किया जाता है। कई बार एकादशी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन जाती है। ऐसे में पंचांग के अनुसार जिस दिन एकादशी तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहती है, उसी दिन व्रत रखना अधिक शुभ माना जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग या विद्वान ज्योतिषाचार्य की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
परमा एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। पीले पुष्प, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक आचरण अपनाएं और भगवान के नाम का स्मरण करें। शाम के समय विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या भजन-कीर्तन करने से व्रत का पुण्यफल और अधिक बढ़ जाता है।
पारण का समय और व्रत का समापन
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण का समय विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी के साथ व्रत पूर्ण माना जाता है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें भोग अर्पित करें और जरूरतमंदों को दान देने का प्रयास करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमपूर्वक पारण करने से व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।