
Expensive Divorce in India : भारत में तलाक की घटनाएँ अब आम होती जा रही हैं, लेकिन कुछ ऐसे मामले भी होते हैं जो सिर्फ भावनात्मक नहीं, आर्थिक तौर पर भी बड़े पैमाने पर असर डालते हैं. जब बात करोड़पति और प्रसिद्ध हस्तियों की हो, तो उनका तलाक न सिर्फ निजी जिंदगी का मामला होता है, बल्कि वह पूरे देश की सुर्खियों में आ जाता है. ऐसा ही एक मामला भारत के सबसे महंगे तलाक का है, जिसमें अलगाव केवल भावनाओं का नहीं, सैकड़ों-हज़ारों करोड़ रुपये का भी था.
गौतम सिंघानिया और नवाज मोदी – भारत का सबसे महंगा तलाक
भारत का अब तक का सबसे महंगा तलाक रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया और उनकी पत्नी नवाज मोदी सिंघानिया के बीच चल रहा है. यह तलाक 2023-24 में उस समय सुर्खियों में आया जब नवाज मोदी ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि उन्हें अपने पति की कुल संपत्ति का 75% हिस्सा चाहिए. रेमंड ग्रुप की कुल अनुमानित संपत्ति ₹11,000 करोड़ से भी अधिक बताई जाती है, और अगर नवाज की मांग पूरी होती है, तो यह भारत का ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे महंगे तलाकों में से एक बन सकता है.
विवाद की शुरुआत
गौतम और नवाज की शादी कई वर्षों तक चली, लेकिन 2023 के दौरान दोनों के बीच तनाव की खबरें सामने आने लगीं. नवाज मोदी ने एक बयान में कहा कि उन्हें और उनकी बेटी को परिवार से अलग कर दिया गया है, और अब वे अपने और अपनी बेटी के भविष्य की सुरक्षा चाहती हैं. इसके जवाब में सिंघानिया ने इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन तलाक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी.
क्या कहती है भारतीय कानून व्यवस्था?
भारतीय कानून के अनुसार तलाक के समय पति और पत्नी के बीच संपत्ति का न्यायसंगत बंटवारा होना चाहिए, लेकिन इसमें कोई निश्चित प्रतिशत तय नहीं होता. परंतु जब बात अरबपति परिवार की होती है, तो सेटलमेंट अमाउंट काफी बड़ा हो सकता है. नवाज मोदी द्वारा मांगे गए 75% हिस्से को लेकर मीडिया और कानूनी विशेषज्ञों में काफी चर्चा हुई.
अन्य चर्चित महंगे तलाक
1. ऋतिक रोशन – सुज़ैन खान
वर्ष 2014 में हुए इस तलाक में ऋतिक ने कथित तौर पर सुज़ैन को ₹380 करोड़ का सेटलमेंट दिया.
2. राजीव मोदी – मोनिका गरवारे
कैडिला के मालिक राजीव मोदी ने अपनी पत्नी को तलाक में ₹200 करोड़ से ज्यादा की राशि दी थी.
3. सैफ अली खान – अमृता सिंह
इस तलाक में सैफ ने अमृता को कथित तौर पर ₹5 करोड़ से अधिक की रकम दी थी.
भारत का सबसे महंगा तलाक संभवतः गौतम सिंघानिया और नवाज मोदी का ही बन सकता है, यदि नवाज को उनकी मांगी गई संपत्ति का हिस्सा मिल जाता है. यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत संघर्ष नहीं, बल्कि भारतीय समाज में बदलते रिश्तों और आर्थिक दृष्टिकोण का भी प्रतिबिंब है. जहां पहले तलाक केवल सामाजिक कलंक माना जाता था, आज यह कानूनी, भावनात्मक और आर्थिक रूप से एक बड़ा निर्णय बन चुका है.
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार स्रोतों पर आधारित है