ग्वालियर : ग्वालियर से महज 20 किमी दूर और मुरैना जिले में आने वाली ऐती पहाड़ी पर त्रेतायुगीन शनि देव विराजमान है। शनिदेव की इस प्रतिमा को त्रेतायुगीन व देश की पहली प्रतिमा माना जाता है। कहते हैं, जब माता सीता की खोज में हनुमानजी लंका गए थे, तो हनुमान जी को वहां पर शनिदेव रावण की कैद में मिले थे। हनुमान जी शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त करने के बाद हनुमानजी ने शनिदेव को ऐंती पहाड पर फेंका था।तभी से शनिदेव यहां एंती पहाड़ी पर विराजमान हैं। शनि अमावस्या के दिन देश विदेश से लाखों श्रद्धालु शनिदेव की शरण में आते हैं।
आज शनी अमावस्या के मौके पर पौराणिक त्रेतायुगीय एती पहाड़ पर स्थित शनि मंदिर पर श्रद्धालुओं का अपने ईष्ट देव के दर्शन के लिए तांता लगा हुआ है । रात से अभी तक यहाँ प्रशासनिक आंकड़ो के अनुसार 4 लाख श्रद्धालुओं के करीब दर्शन कर चुके है और शाम तक यह आंकड़ा 8 लाख तक पहुंच सकता है । पिछले वर्षों का यह आंकड़ा 5 लाख तक ही रह जाता था इस वर्ष यहाँ श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड तोड़ पहुँचने के आसार हे । प्रशासन द्वारा यहाँ भव्य मेले का आयोजन भी किया गया है । प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी की गई है , चम्बल संभाग के तीन जिलों का अतिरिक्त फ़ोर्स भी सुरक्षा के हिसाब से लगाया गया है , लेकिन ट्रैफिक की अगर स्थिती देखे तो श्रद्धालुओं को जांम से भी जूझना पड़ रहा है । रात 12 बजे से जांम लगा हुआ है जो सुबह तक 6 किलोमीटर लंबा तक फैल गया लेकिन पुलिस की व्यवस्था लचर रही , अभी भी श्रद्धालुओं को जांम के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।
हनुमानजी ने शनिदेव को लंका से एंती पहाड़ी पर क्यों फेंका था...
पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग में रावण ने मेघनाथ के जन्म के समय सभी ग्रहों (देवों) सहित शनि देव को भी कैद कर लिया था। ताकि मेघनाथ के जन्म कुंडली में किसी भी गृह का कुप्रभाव ना पड़े । जब माता सीता की खोज में हनुमानजी लंका पहुंचे तो उन्होंने शनिदेव को रावण की कैद में देखा। हनुमानजी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कर दिया। लेकिन शनिदेव इतने कमजोर थे कि शनिदेव कमजोरी की वजह से चल नहीं पा रहे थे। तब हनुमान जी ने शनिदेव की सरसों के तेल से मालिश की , मालिश से शनिदेव के शरीर की पीड़ा दूर हो गई । उसके बाद हनुमानजी ने उन्हें लंका से फेंका, तो शनिदेव एंती पहाड़ पर गिरे। तभी से यहां पर शनिदेव की प्रतिमा विराजमान हैं । मान्यताओं के अनुसार जब हनुमान जी ने शनिदेव को फेंका तब उन्हें वरदान दिया कि जो भी शनिवार के दिन उन पर तेल चढ़ाएगा उस पर शनि की कुदृष्टि नहीं पड़ेगी । साथ ही ये आशीर्वाद भी दिया कि जो भी भक्त हनुमान जी के दर्शन करेगा उस पर भी शनिदेव अपना प्रभाव नहीं दिखा पाएंगे।
हनुमानजी की शनिवार को पूजा क्यों करते है...
वैसे तो शनिवार को शनिदेव का दिन माना जाता है। लेकिन इस दिन हनुमानजी की भी पूजा अर्चना की जाती है। कहा जाता है, शनिवार को हनुमानजी की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते है। पौराणिक कथाओं में इस बात को कहा भी गया है कि जब शनिदेव को हनुमानजी को लंका से मुक्त कराया था तो शनिदेव ने हनुमानजी से कहा था कि यदि कोई शनिवार को हनुमानजी की पूजा करेगा तो वे प्रसन्न होंगे और उस भक्त् को उनका प्रकोप नहीं झेलना पड़ेगा।
ऐसे करें शनि देव की पूजा...
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें। इस दिन शनि देव को तेल अर्पित करें। शनि देव को पुष्प अर्पित करें। शनि देव को भोग लगाएं। शनि देव की आरती करें। शनि चालीसा का पाठ करें। शनि देव के मंत्रों का जप करें। ' ॐ शनैश्चराय विदमहे सूर्यापुत्राय धीमहि।। तन्नो मंद: प्रचोदयात।। इस दिन सरसों के तेल का दान करना भी श्रेष्ट रहता है। इसके लिए स्नान के बाद एक कटोरी तेल में अपना चेहरे देख लें और फिर इस तेल और कटोरी को किसी जरूरतमंद को दान में दे दें। शनिवार के दिन आपको न्याय के देवता शनि देव की पूजा करनी चाहिए। शनि देव को पूजा में काला तिल, सरसों के तेल वाला दीपक दान करना उत्तम होता है। पूजा में संभव हो तो उन्हें नीला फूल अर्पित करें।