मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब सिर्फ सीमित संघर्ष नहीं रह गया है बल्कि एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले चुका है। ईरान, इजराइल और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच जारी इस टकराव ने हजारों जिंदगियों को प्रभावित किया है। सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को झेलना पड़ा है। जहां हमलों में अब तक 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 20,000 से अधिक लोग घायल हैं। अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है और कई जगहों पर इलाज की सुविधा भी प्रभावित हुई हैं। हालात ऐसे हैं कि घायलों को समय पर इलाज मिलना भी मुश्किल हो रहा है जिससे संकट और गहराता जा रहा है।
1000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी
इस युद्ध की आग सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है। लेबनान में भी हालात बेहद खराब हैं। यहां 1000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हजारों घायल हैं। इराक में भी मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है और लगातार हमलों की खबरें सामने आ रही है। इसके अलावा कई छोटे देश भी इस संघर्ष की चपेट में आ रहे हैं। जहां कभी सीधे हमले तो कभी मिसाइलों के गिरने से नुकसान हो रहा है। इससे साफ है कि यह जंग अब क्षेत्रीय नहीं बल्कि बहुदेशीय संकट बन चुकी है।
हमलों के कारण लोगों की मौत हुई
इजराइल और अमेरिका की बात करें तो दोनों देश लगातार अपनी बढ़त का दावा कर रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बता रही है। इजराइल में भी हमलों के कारण लोगों की मौत हुई हैंं। कई इमारतें तबाह हो चुकी हैं। वहीं अमेरिका को भी अपने सैनिकों के नुकसान का सामना करना पड़ा है। इनमें ऑपरेशन के दौरान और दुर्घटनाओं में मारे गए जवान शामिल हैं। यानी यह संघर्ष [संगीत] एकतरफ़ा नहीं है बल्कि हर पक्ष को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ती जा रही है। इस जंग का असर खाड़ी देशों और अन्य पड़ोसी इलाकों में भी साफ दिखाई दे रहा है। यूनाइटेड अमर इमीरात, कुवैत, सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों में भी लोगों की मौत और घायल होने की खबरें सामने आई है।
मानवीय आर्थिक संकट में बदल चुका है
सीरिया और ओमान भी इससे अछूते नहीं रहे। यहां तक कि फ्रांस के सैनिक भी इस संघर्ष की चपेट में आए हैं। यानी यह जंग अब सीमाओं के बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर डाल रही है। कुल मिलाकर यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं बल्कि एक बड़े मानवीय आर्थिक संकट में बदल चुका है। एक तरफ जान माल का भारी नुकसान हो रहा है तो दूसरी तरफ तेल की कीमतों और व्यापार पर भी इसका असर दिख रहा है।