मध्यप्रदेश के छतरपुर और बुंदेलखंड क्षेत्र के किसान अब परंपरागत फसलें छोड़कर सफेद चंदन की खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे 'सफेद सोना' भी कहा जाता है। पहले माना जाता था कि चंदन का उत्पादन सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित है, लेकिन अब मध्य भारत की मिट्टी और मौसम भी इसे सफलतापूर्वक उगाने के लिए उपयुक्त साबित हो रहे हैं। न सिर्फ अच्छी कमाई का साधन, बल्कि यह खेती अब कृषि नवाचार की पहचान बनती जा रही है।
क्यों खास है छतरपुर की मिट्टी चंदन के लिए?
आस्था ग्रीन विलेज नर्सरी के मैनेजर राजू गौतम बताते हैं कि यहां की मिट्टी लाल और पीले चंदन के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि उनमें सैंड (खुशबू और तेल) नहीं बनता। जबकि सफेद चंदन यहां बहुत अच्छी गुणवत्ता के साथ उगता है। इसलिए उन्होंने नर्सरी में सफेद चंदन की खेती को ही प्राथमिकता दी है।
पौधे की कीमत और छूट की सुविधा
नर्सरी में 1 से लेकर 1000 तक सफेद चंदन के पौधे खरीदे जा सकते हैं। एक पौधे की कीमत ₹100 है, जबकि 500 या उससे अधिक पौधे लेने पर 10% की छूट भी दी जाती है। अब तक करीब 5300 पौधे तैयार किए जा चुके हैं।
कब और कैसे करें चंदन की खेती?
चंदन लगाने का सबसे अच्छा समय 15 जून से 15 जुलाई तक है। गर्मी में गड्ढे तैयार कर लेने चाहिए। 2x2 फीट का गड्ढा खोदकर उसमें गोबर कंडा जलाकर मिट्टी को साफ करें, फिर उसमें सड़ी गोबर खाद मिलाएं। पहली तीन बारिशों के बाद मिट्टी बैठ जाए तो पौधा लगाएं।
सरकारी नियम और कमाई की संभावना
सरकारी नियमों के तहत, तीन साल बाद पौधे को खसरे में दर्ज कराना होता है। 12 साल बाद जब पेड़ कटने लायक होता है, तब तहसीलदार को आवेदन देना पड़ता है। एक स्वस्थ पेड़ से 4-5 लाख रुपये तक की कमाई संभव है, यदि उसकी सही देखरेख की जाए।