अगर है पन्ना में आपकी जमीन तब भी हीरा निकालने के लिए आपको सरकार से लेनी होगी मंजूरी ।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिला हमेशा सुर्खियों में रहा है, कारण है, बेशकीमती हीरा......अक्सर आपने अखबारों और टीवी चैनलों में खबर पढ़ी और देखी होगी, कि मप्र के पन्ना जिले में किसी किसानों और मजदूरों को लाखों-करोड़ों के हीरा मिला है । लेकिन क्या आप जानते हैं कि हीरा खोजने के लिए खनन की जमीन किराए पर या इसे कैसे लीज कैसे करा सकते है । दरअसल, हीरा या अन्य खनिज निकालने के लिए जमीन लीज पर लेने की प्रक्रिया सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और खनन कानूनों के अंतर्गत होती है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से खनिज (माइनिंग) मंत्रालय और राज्य सरकार के माध्यम से संचालित होती है। चलिए इसका प्रोसेस हम आपको बताते हैं।
जानते हैं, आवश्यक दस्तावेज और बिक्री की प्रक्रिया।
कैसे मिलती है, हीरा खनन की अनुमति....
पन्ना जिले में खनन के लिए जमीन लेना चाहते हैं, तो आपको हीरा कार्यालय से सरकारी जगह लीज करवाना होगा। इसके लिए आप से आवेदन पत्र, आवेदन शुल्क नक्शा और जमीन की जानकारी, माइनिंग प्लान (खनन का विस्तृत प्रस्ताव) आदि जानकारी मांगी जाएगी।
हीरा खदान की लीज के लिए 2 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, और चालान की रसीद जैसी जानकारी आपको देनी होगी। साथ ही इसके लिए पन्ना जिला हीरा कार्यालय में 200 रुपये का चालान जमा करना होगा। आवेदन
के बाद, हीरा विभाग संबंधित पटवारी और अन्य विभागों से भूमि की जांच और सहमति प्राप्त करता है। सभी स्वीकृतियों के बाद, ही आपको हीरा खनन के लिए क्षेत्र आवंटित किया जा सकेगा।
हाल ही में नियमों में कुछ बदलाव किए गए..
सरकार के अलावा अन्य लोग भी अपनी खदाने बेचते हैं, इन्हें भी खरीदा जा सकता है। लेकिन निजी भूमि पर भी हीरा खनन के लिए वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जरूरी है। बिना वन विभाग की NOC के, राजस्व विभाग या निजी भूमि पर हीरा खदान का क्षेत्र लीज पर नहीं मिलेगा।
खदान से निकला हीरा कैसे बेचा जाता है..
हीरा मिलने के बाद, उसे पन्ना जिले के कलेक्ट्रेट में स्थित हीरा कार्यालय में जमा करना होता है। जहां हीरे की जांच और वजन किया जाता है। इसके बाद हीरे की नीलामी सरकार द्वारा की जाती है, नीलामी में ज्यादा दाम देने वाले व्यक्ति या कंपनी को हीरा मिल जाता है। इस रकम पर 12 प्रतिशत रॉयल्टी (11% रॉयल्टी और 1% टीडीएस) काटकर बाकी रकम हीरा मालिक को दे दी जाती है।