मध्यप्रदेश के दतिया जिले में माँ पीताम्बरा पीठ शक्ति पीठ स्थित है। यहां पर महाभारतकालीन वनखण्डेश्वर शिव मंदिर स्थित है । 10 महाविद्याओं में से एक सातवीं उग्र शक्ति मां धूमावती माई का मंदिर भी स्थित है। माँ पीताम्बरा पीठ मंदिर को शक्तिपीठ भी माना जाता है। कहते हैं कि पीताम्बरा पीठ क्षेत्र में श्री स्वामीजी महाराज के द्वारा मां बगलामुखी देवी और माता धूमवाती देवी की मूर्ति की स्थापना 1935 में की गयी थी।10 महाविद्याओं में से एक सातवीं उग्र शक्ति मां धूमावती का प्रकटोत्सव ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है । जबकि हर साल वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को माँ बगलामुखी जयंती मनाई जाती है । पीताम्बरा पीठ को राजसत्ता और न्याय की देवी माना जाता है, कहते हैं, माँ पीतांबरा देवी के दर्शन मात्र से ही हर व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण हो जाती है।
इस बार चैत्र नवरात्रि 30 मार्च 2025 से शुरू हो रही है, नवरात्रि के 7 दिन तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि विधान से पूजा की जाती है। मध्य प्रदेश में मां देवी के कई सिद्धपीठ स्थान हैं, लेकिन उनमें मां पीताम्बरा का अलग महत्व है। पीतांबरा माँ को राजसत्ता और न्याय की देवी माना जाता है।
मां पीताम्बरा पीठ की स्थापना कब और कैसे हुई..?
देश के शक्तिपीठों में शुमार पीताम्बरा पीठ पर 10 महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी देवी साक्षात विराजमान हैं। मां पीतांबरा देवी को राजसत्ता और न्याय की देवी माना जाता है । माँ पीतांबरा के दर्शन मात्र से हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है । विश्वविख्यात पीताम्बरा पीठ पर मां बगलामुखी देवी की स्थापना 1935 में स्वामीजी महाराज ने की थी। उस समय यहां आने से भी लोग डरते थे। पीताम्बरा माई की स्थापना के साथ ही यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। पीताम्बरा माई को लोग बगलामुखी देवी के नाम से भी पुकारते है।
धीरे-धीरे माँ पीताम्बर की प्रसिद्धि बढ़ने लगी , और बढ़ने लगा भक्तों का तांता...
पीतांबरा माई की स्थापना के कुछ सालों में ही पीताम्बरा पीठ की प्रसिद्धि इतनी बढ़ने लगी । पूरे देश ही नहीं विदेशों से भी लोग पीतांबरा पीठ के दर्शनों के लिए आने लगे । ज्योतिषाचार्य और तंत्र मंत्र के जानकार पंडितों का मानना है कि 10 महाविद्याओं में मां बगलामुखी देवी ऐसी देवी हैं, जो अनुष्ठान और अभिषेक से जल्दी प्रसन्न होती हैं। पीतांबरा माई राजसत्ता की देवी होने के कारण यहां आम लोगों के साथ साथ राजनैतिक लोगों का भी जमघट लगा रहता है। यहां देवी का अनुष्ठान करने से पीतांबरा माई भक्तों की हर तरह की मनोकामना पूरी करने के लिए भी है । पीतांबरा देवी के दर्शन मात्र से भी भक्तों की हर तरह की मनोकामना पूर्ण होती हैं।
तंत्र मंत्र के साथ राजनैतिक देवी भी कहा जाता है....
पीताम्बरा माई को राजसत्ता की देवी कहा जाता है, इसी कारण यहां राजनेताओं का भी तांता लगा रहता है। प्रधानमंत्री रहते हुए स्व.इंदिरा गांधी पीतांबरा पीठ 5 बार आईं। इसके अलावा कई प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से लेकर देश के सभी प्रमुख राजनेता और वीआईपी यहां आते रहते हैं । हां पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी या अटल बिहारी वाजपेयी हो या फिर राजमाता विजयाराजे सिंधिया ही क्यों न हो सभी ने माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर आने वाले हर राजनेता की मुराद पूरी हुई है । उन्हें राजसत्ता का सुख जरूर मिलता है।
कैसे हुई पीतांबरा पीठ की स्थापना ....
करीब 91 साल पूर्व जब यहां के स्वामीजी महाराज आये, तब यहां घनघोर जंगल था । यहां मां बगलामुखी देवी की स्थापना के पूर्व अत्यंत प्राचीन शिव मंदिर था, जंगल में होने के कारण लोग इस मंदिर को वनखंडेश्वर महादेव के नाम से जानते थे। माना जाता है कि ये शिव मंदिर महाभारत कालीन है। माना जाता है कि इस शिव परिवार की स्थापना पांडवों ने की थी । पांडवों के द्वारा शिवजी की स्थापना की वजह से यह मंदिर अत्यंत सिद्ध है। मान्यता है कि अश्वत्थामा यहां भोलेनाथ की पूजा करने आते है ।
बगलामुखी देवी की उत्पत्ति...
बगलामुखी देवी का प्रकाट्य स्थल गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में माना जाता है। मान्यता के अनुसार देवी का प्रादुर्भाव भगवान विष्णु से संबंधित हैं, परिणामस्वरूप देवी सत्व गुण सम्पन्न तथा वैष्णव संप्रदाय से संबंध रखती हैं । परन्तु, कुछ अन्य परिस्थितियों में देवी तामसी गुण से संबंध भी रखती हैं। देश के शक्ति पीठों में शुमार पीताम्बरा पीठ पर दस महाविद्याओं में से दो महाविद्या यानि मां बगलामुखी और मां धूमावती तो विराजमान हैं ही, साथ ही यहां महाभारत कालीन शिवालय भी हैं। जिनके बारे में मान्यता है कि यहां आज भी अश्वत्थामा पूजा करने आते हैं।