मध्यप्रदेश में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का मंदिर आगर जिले की तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। यहाँ देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं। मान्यता है कि बगुलामुखी का यह मंदिर महाभारत के समय का है। मान्यता है कि श्री कृष्ण की प्रेरणा से पांड़वों ने यहां महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए साधना की थी। पहले मातारानी को देहरा के नाम से जाना जाता था। यहां पूजा में हल्दी और पीले रंग के पूजन सामग्री का विशेष महत्व है।
इंदौर।। आगर जिले के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में 30मार्च से चैत्र नवरात्रि महोत्सव शुरू होने जा रहा है। सुबह 9 बजे परंपरागत तरीके से मंदिर में घट स्थापना की गई। इस मौके पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ मंदिर में देखने को मिलेगी।
आइए जानते है बगुलामुखी मंदिर के बारे में...
- तीन मुख वाली मां बगलामुखी का मंदिर मध्यप्रदेश के आगर जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है।
- मान्यता है कि बगुलामुखी का यह मंदिर महाभारत के समय का है। भगवान श्री कृष्ण की प्रेरणा से पांड़वों ने यहां महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए मां की साधना की थी।
- पहले इसे माताजी को देहरा के नाम से जाना जाता था। यहां पूजा में हल्दी और पीले रंग के पूजन सामग्री का विशेष महत्व होता है।
- यह संभवत: अकेला मंदिर है जहां मां को पूजा में खड़ी हल्दी और हल्दी पाउडर चढ़ाया जाता है।
मंदिर में त्रिशक्ति मां विराजित हैं .....
- इस मंदिर में त्रिशक्ति मां विराजित है। ऐसी मान्यता है कि मध्य में मां बगलामुखी, दाएं मां लक्ष्मी तथा बाएं मां सरस्वती जी विराजमान हैं।
- भारतवर्ष में त्रिशक्ति मां का दूसरा मंदिर कहीं नहीं है।
- मान्यता है कि द्वापर युग से इस मंदिर में साधु-संत, तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते हैं।
तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है मां बगलामुखी मंदिर ..….
- मां बगलामुखी मंदिर तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है।
- मंदिर के चारों तरफ श्मशान व पास में ही नदी के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
- पश्चिम में ग्राम गुदरावन, पूर्व में कब्रिस्तान और दक्षिण में कच्चा श्मशान है।
- बताया जाता है कि बगलामुखी तंत्र की देवी हैं, इसलिए यहां पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है।
- यह मंदिर इसलिए भी महत्व रखता है, क्योंकि यहां की मूर्ति स्वयंभू और जागृत है।
यह है मां का स्वरूप....
- मां बगलामुखी में भगवान अर्धनारीश्वर महाशंभों के अलौलिक रूप का दर्शन मिलता है। भाल पर तीसरा नेत्र व मणिजडि़त मुकुट व चंद्र इस बात की पुष्टि करते हैं।
- बगलामुखी को महारुद्र (मृत्युंजय शिव) की मूल शक्ति के रूप में माना जाता है। वैदिक शब्द बग्ला है उसका विकृत आगमोक्ता शब्द बगला अत मां बगलामुखी कहा जाता है।
- भगवती बगला अष्टमी विद्या है। आराधना श्री काली, तारा तथा षोडशी का ही पूर्व क्रम है। सिद्ध-विद्या-त्रयी में पहला स्थान है।
- मां बगलामुखी को रौद्र रूपिणी, स्तभिंनी, भ्रामरी, क्षोभिनी, मोहनी, संहारनी, द्राविनी, जिम्भिनी, पीतांबरा, देवी त्रिनेभी, विष्णुवनिता, विष्णु-शंकर भमिनी, रुद्रमूर्ति, रौद्राणी, नक्षत्ररूपा, नागेश्वरी, सौभाग्य-दायनी, सुत्र संहार, कारिणी सिद्ध रूपिणी, महारावन-हारिणी परमेश्वरी, परतंत्र, विनाशनी, पीत-वासना, पीत-पुष्प-प्रिया, पीतहारा, पीत-स्वरूपिणी, ब्रह्मरूपा कहा जाता है।
कई बड़ी बड़ी हस्तियां मां के दर पर माथा टेक चुकी हैं....
- मां के दरबार में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, उमा भारती, गिरिराज प्रसाद, अमर सिंह, जयाप्रदा तांत्रिक, संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त, सुभाष चंद्रा, सुधीर चौधरी अनुष्ठान करा चुकी हैं।
- इसके अलावा राजमाता विजयराजे सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुनसिंह सहित कई बड़े नेता यहां माथा ठेक चुके हैं। मां को राजनैतिक देवी भी कहा जाता है।
बगलामुखी मंदिर के रहस्य ये हैं....