
China Facts : आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट पर एक तस्वीर या वीडियो अक्सर वायरल हो जाती है, जिसमें देखा जा सकता है कि कुछ चीनी माता-पिता अपने बच्चों की आंखों के किनारों पर पारदर्शी टेप लगाते हैं. यह दृश्य कई लोगों को हैरान कर देता है और मन में यह सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है? क्या यह किसी नई चिकित्सा पद्धति का हिस्सा है, या कोई सौंदर्य संबंधी उपाय? आइए इस विषय को विस्तार से समझते हैं.
दरअसल, चीन सहित कई एशियाई देशों में लोग बड़ी आंखों को सुंदरता का प्रतीक मानते हैं। वहां पर "डबल आईलिड" यानी दोहरी पलकें (eyelid crease) सौंदर्य का एक मानक मानी जाती हैं। लेकिन प्राकृतिक रूप से एशियाई लोगों की आंखों की बनावट कुछ अलग होती है, जिसमें डबल आईलिड नहीं होती। ऐसे में कुछ माता-पिता यह मानते हैं कि अगर बचपन से ही बच्चों की आंखों पर विशेष प्रकार की टेप लगाई जाए, तो आंखों की त्वचा में धीरे-धीरे बदलाव आ सकता है और पलकें डबल लाइन में विकसित हो सकती हैं.
यह टेपिंग आमतौर पर "डबल आईलिड टेप" के रूप में जानी जाती है, जिसे प्लास्टिक सर्जरी का विकल्प मानकर इस्तेमाल किया जाता है। यह टेप पारदर्शी होती है और इसे आंखों की पलकों पर इस तरह चिपकाया जाता है कि एक अस्थायी क्रीज बन जाए। कुछ लोग इसे मेकअप का हिस्सा मानते हैं, जबकि कुछ इसे स्थायी परिवर्तन की उम्मीद में लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों की राय में बच्चों पर इस तरह के सौंदर्य उपायों का प्रयोग करना सही नहीं है। इससे बच्चों की आंखों में जलन, एलर्जी या त्वचा की अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, यह मानसिक रूप से भी बच्चों पर असर डाल सकता है, जिससे वे छोटी उम्र में ही अपने प्राकृतिक रूप को लेकर असंतुष्ट महसूस करने लगते हैं.
चीन में बच्चों की आंखों पर टेप लगाने का चलन मुख्यतः सौंदर्य मानकों से जुड़ा है, जिसमें माता-पिता अपने बच्चों की आंखों को "ज्यादा सुंदर" बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन यह प्रवृत्ति कई बार स्वास्थ्य और मानसिक विकास के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है. हर बच्चे की खूबसूरती उसकी मौलिकता में होती है, और हमें चाहिए कि हम उन्हें जैसा वे हैं, वैसे ही स्वीकार करें और आत्मविश्वास देना सिखाएं.