NEET vs JEE: देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर लीक को लेकर भारी बवाल देखने को मिला। गुस्साएं छात्रों ने जंतर-मंतर पर जोरादर विरोध-प्रदर्शन भी किया। लेकिन इस पूरे विवाद के बीच अब सवाल यह उठता है कि आखिर इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा जेईई का पेपर लीक क्यों नहीं होता है, केवल नीट का ही पेपर क्यों लीक होता है। इस पर आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर और केंद्र सरकार की परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के सदस्य वीं.कामाकोटी ने उन उपायों का खुलासा किया, जिनकी वजह से जेईई परीक्षा सुरक्षित और पारदर्शी बनी रहती है और JEE परीक्षा में कोई पेपर लीक नहीं हुआ।
6 सदस्यीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का हिस्सा रहे
आपको बता दें कि वीं. कामाकोटी, पीएम मोदी की 6 सदस्यीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स का हिस्सा रहे। इस टास्क फोर्स को नीट पेपर लीक को लेकर हफ्तों तक चले विरोध-प्रदर्शनों के बाद बनाया गया। बहुत उम्मीदें हैं कि वे उन खामियों को दूर कर पाएंगे, जिन वजहों से सालों से देश का एग्जाम सिस्टम प्रभावित हुआ है।
अब छात्रों की संख्या 15 लाख पहुंच गई
वीं. कामाकोटी ने बताया कि जब उन्होंने खुद 1985 में जेईई परीक्षा दी थी, तब केवल 5,000 छात्र शामिल हुए थे। लेकिन आज के समय में उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 15 लाख पहुंच चुकी है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की पारदर्शी परीक्षा कराना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन सही टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसे मुमकिन बनाया गया है।
समय के साथ परीक्षा के तरीकों में बदलाव
कामाकोटी के मुताबिक समय के साथ-साथ परीक्षा के तरीकों में भी बड़ा बदलाव आया है। हमने समय के साथ पेपर-पेन वाले टेस्ट से लेकर सब्जेक्टिव पेपर और फिर ऑप्टिकल सेंसर और शीट पहचानने वाली टेक्नोलॉजी तक का बदलाव होते देखा है। पेन-पेपर और सब्जेक्टिव टेस्ट से आगे बढ़ते हुए अब कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्रों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने से रोकने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर जैसी नई तकनीकों की मदद ली जाती है।
2024 में मिले सबक भुला दिए गए
उन्होंने कहा कि इस साल नीट पेपर लीक की घटना इसलिए हुई क्योंकि 2024 में मिले सबक भुला दिए गए और रंगनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू ही नहीं किया गया। राधाकृष्णन कमेटी ने 250 से ज्यादा मजबूत सुझाव दिए थे।
कैसे हुआ नीट पेपर लीक
कामाकोटी ने कहा कि "सच कहूं तो, नीट 2026 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने राधाकृप्षन कमेटी के कई सुझावों को लागू किया था। इसलिए नीट का पेपर एनटीए दफ्तर में छपने जाने, ट्रंक में बंद होने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के दौरान कहीं भी लीक नहीं हुआ। सीबीआई के मुताबिक पेपर NTA से बाहर निकलने से पहले ही लीक हो गया था। दिक्कत यह थी कि किसी भी ऑपरेशन में जो भरोसे का एक आधार होता है, वह आधार ही फेल हो गया। इसी वजह से राधाकृष्णन कमेटी की कड़ी मेहनत और NTA की ओर से उनकी कई सिफारिशें लागू करने की कोशिशों के बावजूद, इस साल पेपर लीक हो गया।