कई लोगों को लगता है कि अगर रात में अच्छी नींद ले ली जाए तो अगले दिन शरीर पूरी तरह तरोताजा रहना चाहिए। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। कई बार 7 से 9 घंटे सोने के बाद भी दिनभर सुस्ती, कमजोरी और काम करने का मन न करने जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। लगातार थकान के पीछे जीवनशैली से लेकर कुछ स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं।
सिर्फ नींद की कमी ही वजह नहीं
थकान का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपने कम नींद ली है। नींद की गुणवत्ता खराब होने, रात में बार-बार जागने या तनाव के कारण भी सुबह उठने के बाद शरीर थका हुआ महसूस कर सकता है। लगातार खराब नींद दिन के समय ऊर्जा और एकाग्रता को प्रभावित कर सकती है।
शरीर में आयरन की कमी भी हो सकती है
अगर थकान के साथ कमजोरी, सांस फूलना, चक्कर या दिल की धड़कन तेज महसूस होती है, तो एनीमिया जैसी समस्या भी एक संभावित कारण हो सकती है। आयरन की कमी एनीमिया का एक आम कारण है और इसमें शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित होती है।
थायरॉइड और दूसरी समस्याएं भी कारण
लगातार थकान कभी-कभी थायरॉइड, डायबिटीज या नींद से जुड़ी समस्या जैसे स्लीप एपनिया के साथ भी देखी जा सकती है। खासकर अगर तेज खर्राटे आते हों, रात में सांस रुकने या घुटने जैसी आवाजें आती हों और दिनभर नींद आती रहती हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
तनाव और दिनचर्या का भी असर
खराब खान-पान, बहुत कम शारीरिक गतिविधि, ज्यादा तनाव और अनियमित नींद भी थकान बढ़ा सकते हैं। नियमित हल्की एक्सरसाइज, संतुलित भोजन और सोने-जागने का एक तय समय रखने से मदद मिल सकती है। सोने से पहले स्क्रीन और कैफीन कम करना भी नींद की आदतों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर थकान कई हफ्तों से बनी हुई है, रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं या इसके साथ वजन कम होना, मूड में बदलाव, सांस फूलना या दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार खून की जांच समेत दूसरी जांचों की सलाह दे सकते हैं।
जरूरी बात: लगातार थकान का कारण हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। केवल लक्षण देखकर खुद से बीमारी या सप्लीमेंट की शुरुआत करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।