यूरोपीय देश इटली इन दिनों विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। महंगाई, कम वेतन, महंगे मकान, रोजगार की असुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं की बदहाल स्थिति ने आम लोगों की नाराजगी बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के खिलाफ यह गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। छात्रों, मजदूरों, किसानों और ट्रेड यूनियनों के प्रदर्शन ने देश के कई बड़े शहरों को प्रभावित किया है।
30 अक्टूबर 2026 को इटली के 40 से अधिक शहरों में देशव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की आर्थिक नीतियों के साथ-साथ बढ़ते सैन्य खर्च और युद्ध से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। हालांकि ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी।
आखिर क्यों भड़का लोगों का गुस्सा?
इटली में मौजूदा विरोध की सबसे बड़ी वजह बढ़ती महंगाई और आम लोगों की कमजोर होती आर्थिक स्थिति है। ईंधन, बिजली, किराया और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ने परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। दूसरी तरफ वेतन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने के कारण लोगों की खरीदारी करने की क्षमता प्रभावित हुई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नौकरी करने के बावजूद उनके लिए घर का किराया, बिजली के बिल और दूसरी जरूरी जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है। खासकर युवाओं में रोजगार की असुरक्षा और अस्थायी नौकरी को लेकर नाराजगी है। छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और स्कूलों तथा विश्वविद्यालयों के लिए अधिक बजट की मांग उठाई है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सा रही।
आवास संकट भी इस विरोध की एक बड़ी वजह है। बड़े शहरों में किराये की ऊंची दरों के चलते युवाओं और कम आय वाले परिवारों के लिए घर लेना मुश्किल हो रहा है।
सैन्य खर्च और युद्ध के खिलाफ भी प्रदर्शन
इटली में विरोध केवल महंगाई और वेतन तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा वर्ग सरकार की सैन्य खर्च बढ़ाने की नीति का विरोध कर रहा है। उनका सवाल है कि जब देश के नागरिक महंगाई, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं की समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो रक्षा और सैन्य तैयारियों पर अधिक पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है?
30 अक्टूबर को जेनोआ बंदरगाह पर भी बड़ी संख्या में मजदूरों और छात्रों ने प्रदर्शन किया। यहां करीब 15 हजार प्रदर्शनकारी बंदरगाह क्षेत्र में पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियारों की खेप के लिए बंदरगाहों के इस्तेमाल का विरोध किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में मारे जा रहे समुद्री कर्मचारियों के मुद्दे को भी उठाया।
पुलिस ने कैसे संभाले हालात?
लगातार बढ़ते प्रदर्शनों और पहले हुई हिंसा को देखते हुए इटली प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रोम, मिलान, ट्यूरिन, बोलोग्ना और अन्य प्रमुख शहरों में पुलिस की भारी तैनाती की गई है।
दरअसल, 17 और 18 अक्टूबर को मिलान में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की थी। पुलिस के साथ झड़पों में कई लोग घायल हुए थे। इसके बाद ट्यूरिन, रोम और बोलोग्ना में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव देखने को मिला।