हिंदू धर्म में अधिक मास को बेहद खास माना जाता है, लेकिन इसके दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। साल 2026 में भी अधिक मास के कारण 15 जून तक कई शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने को कभी देवताओं ने स्वीकार नहीं किया था, जिसके चलते इसे मलमास भी कहा गया। हालांकि बाद में भगवान विष्णु की कृपा से इसे विशेष स्थान मिला। आइए जानते हैं आखिर क्यों अधिक मास में शुभ कार्य बंद हो जाते हैं और इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या कहती है।
क्या होता है अधिक मास?
हिंदू पंचांग चंद्र और सूर्य की गति के आधार पर बनाया जाता है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर हर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास को स्थायी और सांसारिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। विवाह, नया व्यापार, गृह प्रवेश और अन्य शुभ संस्कार इस दौरान टाल दिए जाते हैं। माना जाता है कि इस महीने में किए गए भौतिक कार्य अपेक्षित फल नहीं देते। यही कारण है कि ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में इस समय पूजा-पाठ, जप और दान को अधिक महत्व दिया गया है।
देवताओं ने क्यों ठुकराया था अधिक मास?
पौराणिक कथा के अनुसार जब इस अतिरिक्त महीने का निर्माण हुआ तो किसी भी देवता ने इसे अपना नाम देने और स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इससे दुखी होकर अधिक मास भगवान विष्णु के पास पहुंचा। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम मास” दिया और कहा कि इस महीने में पूजा करने वालों को विशेष पुण्य मिलेगा। तभी से अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाने लगा।
अधिक मास में क्या करना होता है शुभ?
हालांकि इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन धार्मिक साधना के लिए यह समय बेहद श्रेष्ठ माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, श्रीमद्भागवत कथा, गीता पाठ, व्रत, दान और जरूरतमंदों की सेवा करना शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि अधिक मास में किया गया जप-तप कई गुना फल देता है।
कब खत्म होगा अधिक मास 2026?
साल 2026 में अधिक मास की अवधि 15 जून तक मानी जा रही है। इसके बाद विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से हो जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवधि में आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।