Pilot Meal Rule: फ्लाइट में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के सख्त प्रोटोकॉल और सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता है। ऐसा ही एक दिलचस्प और बेहद महत्वपूर्ण नियम कॉकपिट में मौजूद मुख्य पायलट और सह पायलट के खाने को लेकर भी है। फ्लाइट के दौरान कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर को कभी भी एक जैसा खाना नहीं परोसा जाता है। एयरलाइन अक्सर पायलटों के लिए अलग-अलग खाने के नियम अपनाती हैं। आइए जानते हैं कि आखिर यह नियम क्यों अपनाया जाता है।
तबीयत खराब होने का खतरा
अगर प्लेन में परोसा गया कोई खाना खराब हो या उसमें बैक्टीरिया हो, तो उसे खाने वाले व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसे में अगर कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर एक ही तरह का खाना खाएंगे, तो दोनों की तबीयत एक साथ बिगड़ने का खतरा रहता है।
सुरक्षित लैंडिंग की गारंटी
अगर दोनों में से किसी एक पायलट की तबीयत खाने की वजह से बिगड़ती है, तो दूसरा पायलट पूरी तरह स्वस्थ रहता है और विमान का नियंत्रण संभालकर यात्रिओं को सुरक्षित लैंड करा सकता है।
यह भी पढ़ें: Gandhi Jayanti 2026: 'अहिंसा ही सबसे बड़ा हथियार’, गांधी जयंती पर मंच से छा जाने के लिए पढ़ें ये 10 दमदार लाइनें
भोजन का समय भी होता है अलग
बता दें कि कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर का सिर्फ खाने का मेन्यू ही अलग नहीं होता है, बल्कि दोनों के खाने के समय भी अलग रखा जाता है। एक पायलट के खाना खत्म करने और उसके पूरी तरह ठीक महसूस करने के बाद ही दूसरा पायलट खाना खाता है। जब तक एक पायलट खाना खा रहा होता है, तो दूसरा फ्लाइट कंट्रोल, कम्युनिकेशन और कॉकपिट की दूसरी जिम्मेदारियां संभाल रहा होता है।
अलग-अलग शेफ बनाते हैं खाना
कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में दोनों पायलटों का खाना अलग-अलग किचन या अलग-अलग शेफ द्वारा तैयार कराया जाता है, ताकि रिस्क पूरी तरह खत्म हो सके। इन सावधानियों के पीछे मुख्य मकसद कम से कम एक पायलट को ठीक और प्लेन उड़ाने में सक्षम रखता है।