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Heart Attack : हर साल लाखों लोग दिल के दौरे यानी हार्ट अटैक का शिकार होते हैं, और इनमें से एक बड़ी संख्या में यह दौरा सुबह के समय आता है. क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों अधिकतर हार्ट अटैक सुबह-सुबह ही आते हैं? यह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock), हार्मोनल बदलाव और रक्त प्रवाह से जुड़े कुछ खास कारण होते हैं.
सबसे पहले, हमारे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक सुबह के समय कई हार्मोनल गतिविधियों को तेज कर देती है. जैसे ही हम नींद से जागते हैं, शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है. यह हार्मोन शरीर को जागने और दिनभर की गतिविधियों के लिए तैयार करता है, लेकिन यह ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन को भी तेज कर सकता है. इसके साथ ही, सुबह के समय ब्लड क्लॉटिंग (खून का थक्का बनने की प्रक्रिया) की प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है, जिससे रक्त वाहिकाएं संकरी हो सकती हैं और दिल को ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
दूसरा बड़ा कारण यह है कि रातभर सोने के बाद शरीर में हाइड्रेशन यानी पानी की कमी हो जाती है, जिससे खून गाढ़ा हो सकता है. यह भी हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, खासकर उन लोगों पर जो पहले से हृदय रोग से पीड़ित हैं. इसके अलावा, सुबह का समय तनावपूर्ण भी हो सकता है. जैसे ही लोग दिन की शुरुआत करते हैं, ऑफिस जाने की जल्दी, ट्रैफिक का तनाव, और दैनिक जिम्मेदारियां अचानक मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ा सकती हैं. यह दबाव दिल पर नकारात्मक असर डालता है और हार्ट अटैक की आशंका को और बढ़ा देता है.
इसलिए डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि सुबह के समय भारी व्यायाम या अत्यधिक तनाव से बचना चाहिए, खासकर उन लोगों को जिन्हें हृदय से जुड़ी समस्याएं पहले से हैं। सुबह उठते ही कुछ समय रिलैक्स रहना, पर्याप्त पानी पीना, हल्की एक्सरसाइज़ करना और गहरी सांस लेना हृदय को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है. सुबह के समय हार्ट अटैक आने की संभावना कई जैविक और जीवनशैली से जुड़े कारणों पर निर्भर करती है. इसे समझना और अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा सुधार लाना आपके दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. अपने हृदय की सुरक्षा के लिए नियमित जांच करवाएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.