गाजियाबाद एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। 20 नवंबर को यहां AQI 430 दर्ज किया गया, जो दिल्ली और नोएडा से भी अधिक रहा। हालात इतने खराब हैं कि सामान्य रूप से स्वस्थ लोग भी सांस लेने में दिक्कत और बीमारियों का सामना कर रहे हैं। लगातार बिगड़ती हवा ने शहर में अलर्ट बढ़ा दिया है और प्रदूषण के कारणों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धूल बनी सबसे बड़ा प्रदूषक
गाजियाबाद में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह धूल है। शहर के कई इलाकों में सड़कें टूटी हुई हैं, जहाँ लगातार कंस्ट्रक्शन और वाहनों की आवाजाही से धूल उड़ती रहती है। बारिश की कमी और सर्दियों में धीमी हवा के कारण ये धूल हवा में स्थिर हो जाती है, जिससे पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाते हैं। यह प्रदूषण का मुख्य स्रोत माना जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाला उत्सर्जन
शहर में साहिबाबाद, भोपुरा और लोनी जैसे इलाके औद्योगिक केंद्र हैं जहाँ बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां संचालित होती हैं। इन उद्योगों से निकलने वाला धुआं और रासायनिक गैसें हवा की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। नियंत्रण उपायों की मौजूदगी के बावजूद इन पर सख्ती की कमी प्रदूषण को और बढ़ाती है।
वाहनों और कूड़ा जलाने से बढ़ा धुआं
गाजियाबाद में पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या ज्यादा है और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच पर्याप्त नहीं है। वहीं, कई स्थानों पर खुले में कूड़ा जलाने की घटनाएं भी प्रदूषण स्तर को खतरनाक बनाती हैं। इनसे निकलने वाली जहरीली गैसें हवा में तेजी से फैलती हैं।
दिल्ली की नजदीकी भी बनी बड़ा कारण
गाजियाबाद का दिल्ली और नोएडा से भौगोलिक रूप से जुड़ाव भी प्रदूषण बढ़ाता है। जब इन शहरों में स्मॉग की स्थिति होती है, उसका असर गाजियाबाद पर भी पड़ता है। इसके साथ ही शहर में सड़कों पर पानी का छिड़काव, पौधारोपण और नियंत्रण उपायों की कमी हालात को और बदतर बनाती है।
स्थानीय कारणों पर नियंत्रण जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि गाजियाबाद में स्थानीय कारणों की पहचान कर अलग नीतियां बनानी होंगी। फैक्ट्रियों के उत्सर्जन पर सख्त रोक, कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध, और टूटी सड़कों की मरम्मत जैसे कदम तत्काल उठाने होंगे, तभी शहर की हवा को साफ रखा जा सकता है।