भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते इस वक्त एक बेहद अहम दौर में पहुंच गए हैं। दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। 27 जनवरी को होने वाले भारत-ईयू शिखर सम्मेलन को लेकर उम्मीद है कि इस समझौते पर बड़ी घोषणा हो सकती है। इसी बीच यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि आखिरी कदम हमेशा सबसे मुश्किल होता है, लेकिन यही कदम सबसे ज्यादा फायदे भी देता है।
क्यों जरूरी है यह ट्रेड समझौता
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष का कहना है कि यह डील दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक समझौतों में से एक हो सकती है। इससे करीब दो अरब लोगों के लिए एक बड़ा बाजार खुलेगा। अभी भारत और यूरोप के बीच सालाना व्यापार 120 अरब यूरो से ज्यादा का हो चुका है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने से निर्यातकों पर लगने वाला करीब 4 अरब यूरो का टैक्स खत्म हो जाएगा, जिससे व्यापार और निवेश दोनों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
अटके मुद्दों पर बातचीत जारी
इस डील के रास्ते में कुछ बड़े मुद्दे भी हैं, जिन पर अभी सहमति बननी बाकी है। कार्बन टैक्स, ऑटोमोबाइल और स्टील से जुड़े सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। उर्सला वॉन डेर लेयेन ने साफ कहा है कि इन मुद्दों पर व्यावहारिक और दोनों के लिए फायदेमंद समाधान खोजने की कोशिश चल रही है। उनका कहना है कि आखिरी दौर की बातचीत कठिन जरूर होती है, लेकिन इसका नतीजा दोनों देशों के लिए बहुत लाभकारी होगा।
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सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी जोर
सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में भी भारत और यूरोपीय संघ नई साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित समझौते के तहत समुद्री सुरक्षा, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र, सुरक्षित संचार और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे दोनों पक्षों को एक-दूसरे पर भरोसेमंद विकल्प मिलेंगे और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा मजबूत होगी।
बदलती दुनिया में साझा रणनीति
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और अस्थिर हो रही है। ऐसे में भारत और यूरोप जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों का साथ आना बेहद जरूरी है। दोनों पक्ष नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानून में भरोसा रखते हैं। यही साझा सोच इस साझेदारी को और मजबूत बनाती है।
शिखर सम्मेलन से क्या उम्मीदें
27 जनवरी को होने वाले शिखर सम्मेलन से दो बड़े ऐलान की उम्मीद की जा रही है। पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर ठोस प्रगति और दूसरा रक्षा व सुरक्षा साझेदारी की औपचारिक शुरुआत। अगर ऐसा होता है तो यह न सिर्फ भारत और यूरोप के रिश्तों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया को एक मजबूत संदेश देने वाला कदम होगा। यही वजह है कि आखिरी कदम भले ही मुश्किल हो, लेकिन नजरें अब इसी फैसले पर टिकी हैं।