
Sigret Par Ban Kyu Nhi : आज के समय में जब लोग स्वास्थ्य को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं, ऐसे में यह सवाल बार-बार उठता है कि सिगरेट जैसे जानलेवा उत्पाद पर पूरी तरह से बैन क्यों नहीं लगाया जाता. जब यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो चुका है कि तंबाकू और सिगरेट का सेवन कैंसर, हृदय रोग, सांस की तकलीफ और कई अन्य गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है, तो सरकारें इसके उत्पादन और बिक्री की अनुमति क्यों देती हैं? इस प्रश्न के पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारण छिपे हुए हैं.
सबसे पहला और महत्वपूर्ण कारण है राजस्व (टैक्स) का स्रोत। भारत जैसे देशों में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर भारी टैक्स लगाया जाता है. यह सरकार के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत बन गया है. अगर सिगरेट पर पूरी तरह बैन लगा दिया जाए, तो इससे सरकार की आमदनी में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे कई कल्याणकारी योजनाओं पर असर पड़ सकता है. दूसरा बड़ा कारण है रोज़गार और उद्योग. तंबाकू उद्योग में लाखों लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कार्यरत हैं – जैसे कि किसान, मजदूर, फैक्ट्री कर्मचारी, विक्रेता आदि. अगर सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, तो इन सभी की आजीविका पर खतरा मंडराने लगेगा. इससे देश में बेरोजगारी और आर्थिक असंतुलन बढ़ सकता है.
तीसरा पहलू है व्यवहारिकता और वैकल्पिक उपायों की कमी. इतिहास गवाह है कि जब किसी नशीले उत्पाद पर अचानक प्रतिबंध लगाया गया है, तो उसका एक समानांतर अवैध बाजार बन गया है. यदि सिगरेट पर पूरी तरह बैन लगाया गया, तो इसका भी वही परिणाम हो सकता है – नकली उत्पादों की तस्करी, अवैध बिक्री और कानून-व्यवस्था की समस्याएं. हालांकि सरकारें इस दिशा में कई प्रयास कर रही हैं – जैसे कि पैकेट पर चेतावनी चित्र, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध, तंबाकू के विज्ञापन पर रोक आदि. इन प्रयासों का उद्देश्य लोगों को स्वयं सिगरेट छोड़ने के लिए प्रेरित करना है, बजाय इसके कि जबरन रोक लगाई जाए.
सिगरेट पर पूरी तरह बैन न लगने के पीछे मुख्यतः आर्थिक हित, रोजगार, व्यवहारिक समस्याएं और वैकल्पिक समाधान की कमी जैसे कारण हैं. हालांकि, यह भी सच है कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तंबाकू उत्पादों पर निर्भरता कम करना और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना ही एकमात्र स्थायी उपाय है. समाज को एकजुट होकर इस दिशा में आगे बढ़ना होगा.