Jagannath Rath Yatra 2025: विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष स्नान उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इसे 'स्नान पूर्णिमा' कहा जाता है और इस दिन भगवानों को 108 पवित्र जलघड़ों से स्नान कराया जाता है. यह अनोखी परंपरा हर वर्ष रथ यात्रा से करीब 15 दिन पहले होती है और इसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं. आपको बता दें कि पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में हर साल करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं. रेलवे इस यात्रा के मद्देनजर स्पेशल ट्रेनें भी चलाने की व्यवस्था करता है..
108 घड़ों से स्नान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 108 एक पवित्र संख्या है जो वैदिक ज्योतिष और योग में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड में 108 ऊर्जा केंद्र होते हैं और इसी संख्या के जलघड़ों से भगवान को स्नान कराकर उनकी ऊर्जा को जागृत किया जाता है. जल को विभिन्न नदियों, कुओं और जलाशयों से लाया जाता है और वैदिक मंत्रों के साथ भगवानों का अभिषेक किया जाता है.
स्नान के बाद 'अनवसर'
इस विशेष स्नान के बाद भगवानों को 'अनवसर' कहा जाता है, जिसका अर्थ है – वह समय जब भगवान बीमार हो जाते हैं और दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं रहते. उन्हें ‘आरोग्य वन’ में रखा जाता है, जहाँ उनकी देखभाल आयुर्वेदिक विधियों से की जाती है. लगभग 15 दिनों के बाद, रथ यात्रा के दिन भगवान पुनः भक्तों के दर्शन के लिए निकलते हैं. यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भक्तों को शुद्धता, भक्ति और संयम का संदेश भी देती है. स्नान यात्रा रथ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है और पूरे उत्सव का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक चरण है.