
Justice Varma Case: दिल्ली में अपने सरकारी आवास पर कैश की बोरियां मिलने पर जस्टिस वर्मा सुर्खियों में बने हुए हैं. संसद में उनके खिलाफ निष्कासन प्रस्ताव जारी किया गया है. वहीं अब जस्टिस वर्मा ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दाखिल की है. उन्होंने इनहाउस इनक्वायरी और CJI से उन्हें जज के पद से हटाने की सिफारिश को रद्द करने की मांग की है.
पहचान किस लिए छिपाई
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच आज याचिका पर सुनवाई करेगी. आपको बता दें कि याचिका में जस्टिस वर्मा का नाम XXX लिखा है. इस तरह के नाम का उपयोग हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की याचिका में यौन उत्पीड़न या हमले की शिकार याचिकाकर्ता महिलाओं की पहचान को छिपाने के लिए किया जाता है. इसके साथ ही इन शब्दों का इस्तेमाल मैट्रीमोनियल कस्टडी बैटल, हिरासत में आए किशोरों और नाबालिगों की पहचान छिपाने के लिए होता है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई निर्णयों में सभी अदलातों से बलात्कार पीड़ितों का नाम न उजागर करने का अपील की है.
केंद्र इसकी पहली प्रतिवादी है
आपको बता दें कि 17 जुलाई 2025 को दर्ज जस्टिस वर्मा की याचिका का शीर्षक XXX बनाम भारत संघ तय किया गया है. यह इस साल सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई 699वीं सिविल रिट याचिका है. केंद्र इसकी पहली प्रतिवादी बनी है. वहींं सुप्रीम कोर्ट खुद इसकी दूसरी प्रतिवादी है. एक ओर याचिका 'XXX बनाम भारत संघ' जस्टिस दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने सीरियल नंबर 56 पर लिस्ट हुई है. वहीं अधिवक्ता मैथ्यूज जे नेदुम्परा की एक दूसरी याचिका में जस्टिस वर्मा के खिलाफ नकदी, उसके जलने और गायब होने के रहस्य को उजागर करने के लिए FIR दर्ज करने की मांग की गई है.