Conducting Nuclear: अमेरिका के हालिया परमाणु परीक्षणों की मंजूरी ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए इस आदेश के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या कोई देश अमेरिका को ऐसे परीक्षण करने से रोक सकता है? सैद्धांतिक रूप से, अंतरराष्ट्रीय कानून और संधियां मौजूद हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से किसी एक देश के लिए अमेरिका जैसी महाशक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना लगभग असंभव है। परमाणु परीक्षण पर रोक के लिए 1996 में "कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी" (CTBT) बनाई गई थी, जो किसी भी प्रकार के परमाणु विस्फोट पर प्रतिबंध लगाती है। हालांकि, यह संधि अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है क्योंकि अमेरिका समेत कई देशों ने इसे अब तक अनुमोदित (ratify) नहीं किया है।
अंतरराष्ट्रीय संधियां और उनकी सीमाएं
CTBT की निगरानी "CTBTO" नामक संस्था करती है, जिसके पास दुनिया भर में डिटेक्शन सेंसर हैं जो किसी भी परमाणु धमाके का पता लगा सकते हैं। लेकिन इस संस्था के पास किसी देश पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। अमेरिका जैसी शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत वाले देश पर न तो सीधी सजा थोपना संभव है और न ही उसे किसी कानूनी ढांचे के तहत तुरंत रोका जा सकता है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की क्षमता सीमित है।
कहां की जा सकती है शिकायत
यदि कोई देश अमेरिका के परमाणु परीक्षण का विरोध करना चाहता है, तो वह मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) या संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में उठा सकता है। UNSC में प्रतिबंध या निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है, लेकिन अमेरिका स्वयं स्थायी सदस्य होने के कारण अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) या अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के जरिए भी आपत्ति दर्ज की जा सकती है। हालांकि, इन संस्थाओं के पास केवल नैतिक या कूटनीतिक दबाव डालने की शक्ति होती है। नतीजतन, अमेरिका को किसी एक देश द्वारा सीधे तौर पर रोक पाना संभव नहीं है — विरोध केवल वैश्विक राजनीतिक दबाव के ज़रिए ही असर डाल सकता है।