भारत जब भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाता है, तो यह सिर्फ परेड, झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहता। यह दिन दुनिया को भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक प्राथमिकताओं का साफ संदेश देता है। हर साल लोगों के मन में सवाल होता है कि इस बार भारत ने किस विदेशी नेता को मुख्य अतिथि बनाया है। साल 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है और इस बार भी दुनिया की नजर भारत के इस फैसले पर टिकी हुई है।
चीफ गेस्ट चुनने की परंपरा और प्रक्रिया
भारत में गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि को बुलाने की परंपरा 1950 से चली आ रही है। संविधान लागू होने के बाद से ही 26 जनवरी को ऐसे विदेशी नेता को आमंत्रित किया जाता है, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम हो। चीफ गेस्ट का चयन कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं होता। इसके लिए करीब 6 महीने पहले तैयारी शुरू हो जाती है। भारत उस देश के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सैन्य रिश्तों का गहराई से आकलन करता है। आखिर में विदेश मंत्रालय इस नाम पर अंतिम मुहर लगाता है।
2014 से 2025 तक कौन बने मुख्य अतिथि
पिछले एक दशक में भारत के चीफ गेस्ट्स की सूची देखें तो साफ पता चलता है कि भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाई है। 2014 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे, 2015 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और 2016 में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद भारत आए। 2017 में यूएई के मोहम्मद बिन जायद, 2018 में आसियान देशों के 10 नेता और 2019 में दक्षिण अफ्रीका के सिरिल रामफोसा मुख्य अतिथि बने। कोविड के चलते 2021 और 2022 में कोई अतिथि नहीं बुलाया गया।
इन मेहमानों से भारत को क्या मिला
हर मुख्य अतिथि के साथ भारत को ठोस फायदे भी मिले। जापान के साथ बुलेट ट्रेन और रक्षा सहयोग आगे बढ़ा। अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत हुई। फ्रांस के साथ रक्षा और परमाणु सहयोग को नई दिशा मिली। यूएई के साथ ऊर्जा और आर्थिक रिश्ते गहरे हुए। आसियान नेताओं की मौजूदगी ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूती दी। यानी चीफ गेस्ट सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि बड़े फैसलों की नींव भी बनता है।
इसे भी पढ़ें : T20 World Cup 2026 से Bangladesh बाहर, भारत नहीं आने पर होगा इतने करोड़ का नुकसान, Scotland की एंट्री तय!
2026 में यूरोपीय यूनियन की एंट्री
साल 2026 के 77वें गणतंत्र दिवस पर पहली बार यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर भारत आएंगी। इसे भारत और यूरोप के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। इस दौरान भारत-ईयू शिखर सम्मेलन भी होगा, जिससे व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिल सकती है।
क्यों अहम होता है चीफ गेस्ट का फैसला
गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि दरअसल भारत की विदेश नीति का आईना होता है। इससे दुनिया को साफ संदेश जाता है कि भारत किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। 2014 से 2026 तक के चीफ गेस्ट्स देखें तो साफ दिखता है कि भारत ने एशिया, अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका सभी के साथ संतुलन बनाए रखा है। यही वजह है कि गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक सोच और भविष्य की रणनीति का ऐलान भी होती है।